खनन माफियाओं के हौसले बुलंद, शिकायत के बाद भी आलाधिकारी ने साधी चुप्पी
1 min readतहसील प्रशासन की चुप्पी बढ़ा रही खनन माफियाओं के हौसले
बल्दीराय, सुल्तानपुर
तहसील क्षेत्र में अवैध खनन का खेल दिनों-दिन बेकाबू होता जा रहा है। डीह ग्रामसभा के गाटा संख्या 661—जिसे वर्ष 2018 में सरकारी प्रक्रिया के तहत यूपीडा को बैनामा किया जा चुका है—में खनन माफिया खुलेआम मिट्टी निकालकर लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। विभागीय संरक्षण और तहसील प्रशासन की रहस्यमयी चुप्पी ने इस गैरकानूनी धंधे को और ताकत दे दी है।
ग्रामसभा की लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। भवानीगढ़ गांव के ज्ञान प्रकाश पुत्र राम किशोर पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी भूमि को आठ फीट तक गहराई तक खोदकर मिट्टी बेच दी। शिकायतकर्ता सर्वेश कुमार पुत्र ग़यादत्त यादव निवासी भवानीगढ़ द्वारा इस संबंध में 10/11/2025 को जिलाधिकारी सुल्तानपुर को दिया गया शिकायती पत्र प्रशासन की फाइलों में दबा रह गया।

जिलाधिकारी ने उपजिलाधिकारी बल्दीराय को जांच एवं कार्रवाई की आख्या मांगी थी, लेकिन राजस्व कर्मियों और खनन विभाग की कथित सांठगांठ के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि राजस्व और खनन विभाग के कुछ कर्मचारी खनन माफिया के साथ मिलकर सरकारी संसाधनों की खुली लूट में शामिल हैं। इन विभागीय कर्मियों की छत्रछाया में उक्त व्यक्ति लगातार अवैध खनन कर रहा है, जबकि तहसील प्रशासन मौन साधे बैठा है।
पूर्व एसडीएम गामिनी सिंगला की कार्रवाई बनी मिसाल
विदित हो कि पूर्व में इसी गाटा पर अतिक्रमण कर बुवाई किए जाने की शिकायत पर तत्कालीन तेजतर्रार उपजिलाधिकारी गामिनी सिंगला ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फसल नष्ट करवाई थी और जमीन खाली करवाई थी। उनके हटने के बाद खनन माफियाओं ने एक बार फिर सक्रिय होकर जमीन को दुबारा खोदना शुरू कर दिया और लाखों की मिट्टी बेचकर सरकारी जमीन को खोखला कर दिया।
प्रश्न बड़ा है—क्या जिलाधिकारी के आदेश तहसील में बेअसर हैं?
जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी के आदेशों को तहसील स्तर पर नजरअंदाज किया जाना गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि यही स्थिति रही तो सरकारी जमीनें माफियाओं के कब्जे और खनन की खुली मंडी बन जाएंगी।
शिकायतकर्ता सर्वेश कुमार ने जिला प्रशासन से अवैध खनन मे लिप्त व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई की मांग की हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब तक जनहित में ,कार्रवाई नहीं होगी,, सरकारी भूखंडों के खनन माफियाओं के हौसले बुलंद रहेंगे और सरकारी जमीनों की क्षति होती रहेगी ।
