रेलवे स्टेशन की बदहाली चरम पर,यात्री बेहाल,जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
1 min readकर्नलगंज रेलवे स्टेशन की बदहाली चरम पर,यात्री बेहाल
जिम्मेदार अफसरों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
कर्नलगंज, गोंडा।
कर्नलगंज रेलवे स्टेशन इन दिनों अव्यवस्था का ऐसा उदाहरण बना हुआ है, मानो यहाँ व्यवस्था सुधार का कोई जिम्मेदार ही न हो। स्टेशन परिसर में हालत इतनी खराब है कि प्लेटफॉर्म नंबर एक पर लगी शीतल पेयजल की टोंटियों से तेज धार में बह रहा पानी स्टेशन को ‘मिनी स्विमिंग पूल’ में बदल दे रहा है। यहां पानी की कई टोंटियां और हैंडपंप खराब पड़े हैं, लेकिन मरम्मत कराने वाला कोई नहीं है। खुलेआम हो रही पानी की बर्बादी यात्रियों के लिए मुसीबत का कारण बन चुकी है, वहीं विभाग की लापरवाही साफ झलक रही है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बना शुलभ शौंचालय भी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। शौंचालय में गंदगी का अंबार लगा है, तेज दुर्गंध से यात्रियों का गुजरना तक मुश्किल हो रहा है। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई दिनों से शौचालय की सफाई नहीं कराई गई, जबकि रोजाना हजारों यात्री स्टेशन का उपयोग करते हैं। जबकि बड़े-बड़े दावे हैं– स्वच्छ भारत मिशन, स्वच्छ कर्नलगंज–सुंदर कर्नलगंज…लेकिन हकीकत स्टेशन की दीवारों, नालियों और टोंटियों से बहते पानी में साफ दिखाई पड़ती है। स्टेशन पर फैली गंदगी, पानी की बर्बादी और खराब सुविधाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे हैं? क्या व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित है?
क्या यात्रियों की तकलीफें किसी को दिखाई नहीं देतीं? स्थानीय यात्रियों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। न तो टोंटियों की मरम्मत हुई और न ही शौचालय की सफाई व्यवस्था सुधरी। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि स्टेशन की ये बदहाली आखिर कब सुधरेगी? और यात्रियों की आवाज़ पर जिम्मेदार कब जागेंगे? कर्नलगंज रेलवे स्टेशन की यह स्थिति न सिर्फ विभागीय लापरवाही का परिणाम है, बल्कि स्वच्छता और सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर सिस्टम की सुस्त कार्यप्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।
महादेव मौर्या

