February 12, 2026

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करवा चौथ पर्व को लेकर गांव, शहर एवं नगर की दुकानें हुई गुलजार,पति की लंबी आयु व खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए महिलाए रखतीं हैं निर्जला व्रत

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अयोध्या

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत एवं स्त्रियों के दांपत्य जीवन में पति सौख्य का प्रतीक करके चतुर्थी करवा चौथ का व्रत कल दिन शुक्रवार 10 अक्टूबर के कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को मनाया जाएगा। जहां शुक्रवार की शाम 7:58 पर चन्द्रोदय होगा। वहीं आज दिन गुरूवार को बाजारों में चहल-पहल एवं गृहणियां सामान खरीदने में व्यस्त रही हैं।
ज्योतिषविद् पं. डॉ. एनपी मिश्र महाप्रबंधक शिवधाम मंदिर बैढ़न के अनुसार करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को करवा माता और शिव परिवार की पूजा करनी चाहिए । इसके बाद करवा चौथ की व्रत कथा सुन कर चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करना चाहिए । इस व्रत में विभिन्न रीति-रिवाज और अनुष्ठान शामिल होते हैं। साथ ही बताया कि इस दिन चंद्रोदय शाम 7:58 बजे होगा। उसी समय चंद्र देव को दूध से अर्घ्य देखकर उनका दर्शन पूजन किया जाएगा।
करवा चौथ की पूजा विधि एवं महत्व
करवा चौथ की पूजा चौकी पर करवा माता, शिव-पार्वती, गणेशजी और कार्तिकेय भगवान समेत शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। करवा चौथ के दिन मिट्टी के करवे का इस्तेमाल करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। करवे पर हल्दी कुमकुम जरूर लगाएं और कलावा बांधे। करवे को अन्न-धन और सूखे मेवे और एक सिक्के से भरें। करवे को मिट्टी के दिये से ढक दें। साथ ही करवा चौथ व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस व्रत में करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय भगवान के साथ-साथ गणेश जी की पूजा की जाती है। महिलाएं अपने व्रत को चंद्रमा के दर्शन करने के बाद खोलती हैं। ये एक बेहद कठोर व्रत माना जाता है। क्योंकि इस दिन अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है।

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