February 12, 2026

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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का 9 वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन हुआ संपन्न

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बांदा से भी 6 कार्यकर्ताओं ने किया प्रतिभाग

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का अधिवेशन राष्ट्र निर्माण का महायज्ञ

वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की टीईटी संबंधी समस्या का होगा समाधान:पंकज सिंह

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का नवम राष्ट्रीय अधिवेशन जयपुर में संपन्न हुआ। जिसमें जनपद बांदा से मंडल अध्यक्ष डॉ शिव प्रकाश सिंह, जिलाध्यक्ष पंकज सिंह,कोषाध्यक्ष मनोज सिंह, संगठन मंत्री संतोष कुमार मिश्र, संयुक्त महामंत्री विनोद कुमार शिवहरे, बड़ोखर ब्लॉक अध्यक्ष सुरेंद्रबीर वर्मा ने प्रतिभाग किया।
जिला अध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि दिनांक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2025 तक 3 दिनों में “शिक्षक राष्ट्र के लिए” थीम लेकर अधिवेशन सम्पन्न हुआ। अधिवेशन का उद्घाटन राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा द्वारा किया गया। राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री आदि उपस्थित रहे।तीन दिनों तक देश के उत्कृष्ट शिक्षाविदों एवं विचारको के साथ संपूर्ण देश के प्रत्येक जिले के 3500 से अधिक प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं/शिक्षकों ने विचार मंथन कर देश की दिशा तय करने का काम किया। शिक्षा एवं सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रो के के अग्रवाल, प्रो कुसुमलता केडिया एवं डॉ रामचंद्रन आर्य जैसे तीन शिक्षाविदों को शिक्षा भूषण सम्मान दिया गया। महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी महाराज का भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। अधिवेशन के अंतिम दिन सुधांशु त्रिवेदी जी द्वारा “राष्ट्रीय सुरक्षा: सीमाओं से समाज तक” विषय पर गंभीर एवं तर्कपूर्ण विचार रखते हुए प्रकाश डाला गया।
साथ ही तीन प्रस्ताव पास किए गए। जिसमें शिक्षा और शिक्षकों की समस्याओं का तत्काल समाधान शीर्षक के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा के शिक्षकों के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में ही शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के संबंध में लिए गए फैसले से 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवं पदोन्नति की सुरक्षा हेतु तत्काल समाधान की पुरजोर मांग की गई है,01 जनवरी 2004 से पूर्व की पुरानी पेंशन योजना सभी शिक्षकों के लिए लागू किया जाए, सभी स्तरों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु पूरे देश में समान रूप से 65 वर्ष की जाए, शिक्षकों से केवल शिक्षण कार्य कराया जाए उन्हें एमडीएम की व्यवस्था से मुक्त रखा जाए, सभी शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक छात्र अनुपात सुनिश्चित किया जाए और प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर प्रत्येक कक्षा हेतु कम से कम एक शिक्षक अवश्य हो।शिक्षकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध कराई जाएं और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। आदि मांगो का प्रस्ताव करके भारत सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया, जिसके परिणाम आप सभी को आगामी कुछ दिनों में नजर आएंगे।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ शिक्षा, शिक्षक,देश एवं समाज के हित चिंतन एवं इनके उत्थान हेतु प्रभावी कार्य करने के साथ ही शिक्षक समस्याओं के समाधान हेतु प्रतिबद्ध है।

      
  

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