February 11, 2026

Awadh Speed News

Just another wordpress site

संत मुरलीधर महाराज की राम कथा का तीसरा दिन, भक्ति और धर्म के महत्व पर दिया जोर

1 min read
Spread the love

संत मुरलीधर महाराज की राम कथा का तीसरा दिन, भक्ति और धर्म के महत्व पर जोर
धौलपुर राजस्थान। धौलपुर शहर के मचकुंड रोड परशुराम धर्मशाला में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के तीसरे दिन, पूज्य संत मुरलीधर महाराज ने श्रोताओं को भक्ति और धर्म के महत्व के बारे में बताया. महाराज ने रामकथा के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि कैसे भक्तों के जीवन में राम नाम का जाप उन्हें हर संकट से उबारता है और उन्हें जीवन का सच्चा मार्ग दिखाता है.
कथा के तीसरे दिन, महाराज ने कौशल्या के प्यारे राम, दशरथ के दुलारे राम और भक्तों के रखवाले राम के भजनों के साथ भावपूर्ण प्रवचन दिए, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. उन्होंने श्रोताओं को इस बात पर जोर दिया कि सत्य और धर्म के पथ पर चलने से ही व्यक्ति को शांति और सच्ची खुशी मिल सकती है। महाराज ने कहा कि हम सभी को राम रूपी राम कथा गंगा में डुबकी लगाना चाहिए भगवान के श्री चरणों में शीश झुकाना चाहिए, संतों के दर्शन करना चाहिए उन्होंने कहा कि जिनके हृदय में भगवान की भक्ति नहीं है वह जीते जी मरे के समान हैं और जिन्होंने अपनी जीभ से भगवान का गुणगान नहीं किया उनकी जीव दादुर यानी मेढक के समान है
राम कथा में संत मुरलीधर महाराज ने शिवजी भगवान और मां पार्वती के विवाह के बारे में भी बताया महाराज ने बताया कि भगवान शंकर जी ने मां पार्वती मैया जी से कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है। तब भगवान अवतार लेते हैं।
जो चोरी करते हैं चुगली करते हैं पराया धन-हड़पते हैं, जो माता-पिता की सेवा नहीं करते हैं । जो ब्राह्मण और गायो को मारते हैं साधु संतों का तिरस्कार करते हैं जो अनीति के कार्य करते हैं तब भगवान अलग-अलग रूपो में अवतार लेते हैं और इन असुरों से साधु संत, ब्राह्मण ,गायों की रक्षा करते हैं।

संत मुरलीधर महाराज ने अपनी रामकथा में भगवान श्री राम के जन्म का विस्तृत वर्णन किया
रामकथा में, संत मुरलीधर जी ने राजा दशरथ द्वारा करवाए गए यज्ञ और उसके प्रसाद के बाद रानी कौशल्या के गर्भधारण का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि यह दिव्य जन्म धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ था।
इस तरह, संत मुरलीधर जी ने रामकथा के माध्यम से भगवान राम के जन्म की ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारी को श्रोताओं तक पहुंचाया

जिसमें उन्होंने बताया कि चैत्र मास की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में, पाँच ग्रहों के उच्च स्थिति में होने पर राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या देवी ने श्रीराम को जन्म दिया था। उन्होंने तुलसीदास की रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण का उल्लेख करते हुए इस दिव्य घटना को सविस्तार समझाया।
संत मुरलीधर जी ने अपनी कथा में वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास की रामचरितमानस में वर्णित तथ्यों को आधार बनाया है।

रामकथा में, संत मुरलीधर महाराज ने बताया कि यह दिव्य जन्म धर्म की पुनर्स्थापना के लिए हुआ था।
इस तरह, संत मुरलीधर जी ने रामकथा के माध्यम से भगवान राम के जन्म की ऐतिहासिक और धार्मिक जानकारी को श्रोताओं तक पहुंचाया।

राम कथा में श्री श्री 1008 अवधूत पागल बाबा एवं अन्य साधु संत भी पधारे।
श्री राम कथा के मुख्य यजमान राकेश कांटे एवं उनकी धर्मपत्नी बेबी , श्री राम कथा के संयोजक श्री भगवान मित्तल सराफ ने बताया कि दैनिक यजमान अरविंद बंसल, श्रीमती रमा, महेश चंद शास्त्री माया शर्मा, रामदास गर्ग, मीरा गर्ग, मोहन गर्ग, कमल गर्ग, मुकंद स्वरूप शर्मा, नीलम शर्मा, यस पुरोहित ,श्रीमती शीला पुरोहित, श्री भगवान मित्तल श्रीमती विद्या देवी ने राम कथा एवं व्यास पीठ की पूजा अर्चना की।

ब्यूरो विजय शर्मा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *