वृक्षारोपण अभियान की हकीकत, कागजों में हरियाली, धरातल पर सूखे पौधे
1 min readगोंडा।
जिले में सरकार के महत्वाकांक्षी वृक्षारोपण अभियान की हकीकत सामने आ रही है,जो कागजों तक सीमित दिख रही है। शासन-प्रशासन द्वारा लाखों पौधे लगाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कर्नलगंज में रखे गए सैकड़ों हरे-भरे पौधे सूख रहे हैं। ये पौधे अभियान के तहत रोपित किए जाने थे, मगर लापरवाही और अनदेखी के चलते इन्हें जमीन में लगाने की बजाय परिसर में रखकर ही छोड़ दिया गया जो जमीन पर ढेर की शक्ल में पड़े पड़े सूख रहे हैं। सीएचसी कर्नलगंज प्रशासन की यह लापरवाही न केवल सरकार की हरित पहल को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि लाखों रुपये के बजट के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर अनजान बने हुए हैं। सवाल उठता है कि आखिर पौधों को रोपने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी किसकी है? सूखते पौधे इस बात का सबूत हैं कि वृक्षारोपण अभियान महज कागजी दिखावा बनकर रह गया है।कई ग्रामीणों ने बताया कि पौधों की आपूर्ति तो हो रही है,लेकिन उनकी देखभाल और रोपण की कोई व्यवस्था नहीं है। इस लापरवाही के पीछे गहरी सांठगांठ और भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। अगर जिले में अब तक हुए वृक्षारोपण का स्थलीय सत्यापन और गहन जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर घोटाले और फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जवाबदेही और पारदर्शिता के ऐसे अभियान पर्यावरण संरक्षण के बजाय केवल सरकारी धन की बर्बादी का कारण बन रहे हैं। जिला प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, भविष्य में पौधों की देखभाल के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि हरियाली का सपना हकीकत बन सके।

