मांझा गांव में इंटरलॉकिंग मार्ग पर जबरन कब्जे का मामला गर्माया,ग्रामीणों में भारी आक्रोश
1 min readमांझा गांव में इंटरलॉकिंग मार्ग पर जबरन कब्जे का मामला गर्माया,ग्रामीणों में भारी आक्रोश
जिलाधिकारी से की गई सख्त कार्रवाई की मांग
कटरा बाजार, गोण्डा।
कटरा बाजार थाना क्षेत्र के पूरे महोलिया के मजरा माझा गांव में इंटरलॉकिंग सड़क को लेकर विवाद ने गहरा रूप ले लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग किस्म के लोगों द्वारा जबरन इंटरलॉकिंग मार्ग पर अवैध कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। इसके विरोध में गांव के शिव प्रसाद पाण्डेय, ओम प्रकाश पाण्डेय और राम प्रसाद पाण्डेय समेत कई लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर एक लिखित प्रार्थना पत्र सौंपा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह इंटरलॉकिंग सड़क वर्ष 2009 में सरकारी योजना के तहत बनाई गई थी,जो मांझा गांव के मुख्य संपर्क मार्गों में से एक है। लेकिन हाल के दिनों में अशोक कुमार, सर्वेश कुमार, अयोध्या कुमार, सुरेश कुमार, राकेश कुमार पुत्र केदारनाथ और आज़म अली नामक व्यक्तियों द्वारा उक्त सड़क पर अतिक्रमण कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रार्थना पत्र में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन लोगों ने करीब 20 मीटर तक इंटरलॉकिंग ईंटें उखाड़ दी हैं, जिससे गांव का मुख्य रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। यह कार्य ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की मिलीभगत से किया जा रहा है, जिसकी वजह से आम ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जब उन्होंने इस अवैध कार्य का विरोध किया तो उक्त व्यक्तियों ने उन्हें भद्दी भद्दी गालियाँ देते हुए जान से मारने की धमकियाँ दीं,जिससे गांव के लोगों में भारी दहशत है। महिलाओं और बुजुर्गों को भी इन धमकियों से डराया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त लोग पहले भी इसी प्रकार दो फुट जमीन अतिक्रमण कर सड़क को घेरने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी से इनका हौसला और बढ़ गया है।ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस संबंध में उन्होंने 12 जुलाई को कटरा बाजार थाने में एक शिकायत पत्र दिया था, जिसमें सभी तथ्यों के साथ पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश अब तक न तो पुलिस की ओर से कोई ठोस जांच की गई और न ही किसी प्रकार की कार्यवाही की गई। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी से सीधी हस्तक्षेप की मांग की है। इंटरलॉकिंग मार्ग की तत्काल मरम्मत कराकर आवागमन बहाल कराया जाए। जबरन कब्जा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही की जाए। ग्रामीणों को डराने-धमकाने वाले लोगों पर भय एवं बल प्रयोग की धाराओं में मामला दर्ज हो। प्रधान प्रतिनिधि की भूमिका की भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु प्रशासनिक निगरानी रखी जाए। इस पूरे प्रकरण से कटरा बाजार थाना प्रशासन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। यह मामला अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक मार्ग को बाधित करना भी कानूनन अपराध है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से यह आग्रह किया है कि यदि इस मामले में शीघ्र प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई, तो वे धरना-प्रदर्शन या अनशन जैसे लोकतांत्रिक कदम उठाने को विवश होंगे।

