February 11, 2026

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कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में व्याप्त विभिन्न समस्याओं को लेकर लिखा पत्र कार्रवाई की मांग

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“बांदा कृषि एंव प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में व्याप्त खामियों के लिए शोधार्थी ने कुलाधिपति तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव को लिखा पत्र, जांच एंव न्याय की किया मांग “
बांदा:

बांदा कृषि एंव प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा के सब्जी विज्ञान के शोधार्थी एंव विश्वविद्यालय के छात्र परिषद के अध्यक्ष कल्याण सिंह ने विश्वविद्यालय में व्याप्त खामियों के जांच एंव न्याय हेतु कुलाधिपति/मा. राज्यपाल उत्तर प्रदेश तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव को पत्र लिखकर जांच एंव आवश्यक कार्यवाही की मांग किया हैं! शिकायतकर्ता कल्याण सिंह ने यह आरोप लगाया हैं कि विश्वविद्यालय में नियमों को धत्ता बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन कार्य कर रहा है, जो कही से भी न्याय संगत नही हैं! प्रस्तुत प्रकरण के अंतर्गत यह आरोप लगाया है कि सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजीत सिंह ने
विश्वविद्यालय के आर. आई. बी. एक्ट तथा उत्तर प्रदेश राज्य कृषि विश्वविद्यालय अधिनियम-1958 तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-1956 के अंतर्गत पीएचडी/ एम. फिल हेतु निर्धारित नियमावली-2018 के अंतर्गत बिना सक्षम अधिकारी के अनुमोदन के विभागीय शोध समिति (डी.आर. सी.) का गठन कर लिया गया, तथा जांच के नाम पर भेदभाव, एंव मूल्यांकन करके मानसिक रूप से प्रताड़ित किये हैं जो नियमों का स्पष्ट रूप से अवहेलना एंव उल्लंघन हैं!
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर सुरेंद्र कुमार सिंह को अनेकों बार पत्र देने के बाद भी विश्वविद्यालय इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, और आवश्यक कार्यवाही के बदले मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है!
शिकायतकर्ता कल्याण सिंह ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-1956 के तहत गठित छात्र शिकायत निवारण समिति (एस.जी.आर.सी.) विनियम-2023 में पत्र देने के बाद कार्यवाही न करने के बदले सब्जी विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजीत सिंह को ही अवगत कराने की बात को लिखित रूप में शिकायतकर्ता को अवगत करा दिया गया, जो हास्यास्पद हैं!
विश्वविद्यालय के द्वारा संज्ञान लेकर कार्यवाही नही किये जाने से व्यतिथ होकर कल्याण सिंह ने राज्यपाल महोदया तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव को पत्र लिखकर संपूर्ण प्रकरण की जांच की मांग किया है! वही दूसरी तरह उत्तर प्रदेश मानवाधिकर आयोग मे शिकायत के बाद इस संपूर्ण मामले की जांच जिलाधिकारी बांदा को मिली है! अब यह देखने वाली बात होगी कि इस मामले में आवश्यक कार्यवाही क्या होतीं हैं!

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