उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने खोला श्री राम जानकी महाविद्यालय के फर्जी वाडे का पिटारा,निकल रहा जिन्न
1 min readमहाविद्यालय स्थापना के फर्जी बाड़े का निकल रहा जिन्न
मिल्कीपुर क्षेत्र स्थित श्री राम जानकी महाविद्यालय रामनगर अमांवा सूफी का है मामला
उच्च न्यायालय के अधिवक्ता ने खोला महाविद्यालय के फर्जी बाडें का पिटारा
मिल्कीपुर अयोध्या
मिल्कीपुर क्षेत्र स्थित श्री राम जानकी महाविद्यालय रामनगर अमावां सूफी के प्रबंध तंत्र द्वारा विद्यालय स्थापना से लेकर अब तक हुए फर्जी बड़े एवं भ्रष्टाचार के जिन्न का एक के बाद एक के बाहर निकलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के एक अधिवक्ता द्वारा उक्त शिक्षण संस्थान के प्रबंध तंत्र द्वारा की गई अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की कलई परत दर परत खोलते हुए अनवरत शिकायत पर शिकायत दर्ज कराई जा रही है। हालांकि शिकायतों के बाद फर्जी बाड़ा प्रकरण में अभी कोई प्रभावी कार्यवाही तो नहीं हो सकी है, अलबत्ता जांच पड़ताल की रफ्तार जरूर तेज पकड़ चुकी है।
उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता पवन कुमार पांडे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी शिकायत प्रणाली जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि अमावां सूफी निवासी अवधेश कुमार शुक्ला पुत्र हरिशंकर शुक्ला द्वारा धोखाधड़ी जालसाजी करते हुए फर्जी एवं कूट रचित तरीके से श्री राम जानकी महाविद्यालय रामनगर अमावस सूफी अयोध्या के नाम दर्शाकर पहले मान्यता व संबद्धता प्राप्त की गई और बाद में बीते 8 में 2015 को तत्कालीन एसडीएम मिल्कीपुर को अनुचित लाभ देते हुए साजिशी तौर पर हमराह करके दूसरे के नाम दर्ज खतौनी को गैर कानूनी तरीके से अकृषिक भूमि घोषित करवा लिया। राजस्व गांव अमावां सूफी की गाटा संख्या 1903 मि, 1905 मि, 1906,1907 मि, व गाटा संख्या 1908 पर जिस पर विद्यालय उपरोक्त को निर्मित दर्शाया गया है। वास्तविक रूप में यह भूमि किन्ही अन्य खातेदारों के नाम दर्ज कागजात खतौनी है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्तमान समय में श्री राम जानकी महाविद्यालय रामनगर अमावां सूफी के नाम भूलेख के अनुसार जो खतौनी उपलब्ध है उनके गट नंबर 2848, 2854, 2858, 2859, 2860, 2861 व 2862 हैं। अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अवधेश कुमार शुक्ला ने गंभीर संगे अपराध कार्य किया है। शिकायतकर्ता श्री पांडे ने प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए वैधानिक कार्यवाही करने तथा कॉलेज उपरोक्त की मान्यता समाप्त करके मामले में संलिप्त जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है। अब देखना है कि शिकायतों के बाद मिल्कीपुर तहसील का प्रशासनिक अमला ऐसे गंभीर मामले में कौन सा रूख अख्तियार करता है।


