बोधगया के महाबोधि प्रकरण में मोस्ट ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
1 min readबोधगया के महाबोधि प्रकरण में मोस्ट ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
मोस्ट ने गैर बौद्धों को हस्तक्षेप को बताया मूल अधिकार के विरुद्ध
सुलतानपुर।

मोस्ट कल्याण संस्थान के तत्वाधान में मोस्ट जनरल सेक्रेटरी राम उजागिर यादव के नेतृत्व में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन उप जिलाधिकारी सदर को सौंपा गया।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्राचीन साहित्यों व पुरातात्विक सर्वेक्षण रिपोर्ट से बोध गया स्थित महाबोधि महाविहार स्थल बौद्ध उत्पत्ति और विरासत की पुष्टि करते हैं और यह पवित्र स्थल प्राचीन काल से केवल बौद्धों के नियंत्रण और देख रेख में रहा है किंतु बोधगया मंदिर अधिनियम (बी०टी०एम०सी०) 1949 जो पवित्र महाबोधि महाविहार में गैर बौद्ध प्रथाओं एवं अनुष्ठानों को मानने वाले पुजारियों को शामिल करने का अवसर प्रदान करता है। यह अधिनियम न केवल बौद्ध धम्म और बौद्ध संघ की पवित्रता को अपमानित करता है बल्कि बौद्ध धम्म के सार का अनादर कर दुनिया भर के बौद्धों पर ब्राहम्णी अनुष्ठानों को थोपता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि भारत का संविधान अनुच्छेद 25, 26 और 30 धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों की गारंटी देते हैं बौद्ध धम्म में आस्था विश्वास रखने वालों के उक्त मूल अधिकारों की रक्षा करते हैं।
मोस्ट ने मांग की है कि बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 जो गैर बौद्धों को हस्तक्षेप करने का अवसर प्रदान करता है उसे रद्द किया जाय और बौद्ध संचालित प्रबन्धन ट्रस्ट की स्थापना की जाय, जिसका प्रबन्धन पूरी तरह से बौद्धों द्वारा किया जाए, महाबोधि महाविहार गैर बौद्धवादी प्रभाव से पूर्णतया मुक्त रखा जाय।
ज्ञापन देने वालों में प्रदेश प्रमुख जीशान अहमद, जिला संयोजक राकेश निषाद, महासचिव नन्दलाल बौद्ध, कैप्टन “रक्षक दल” रोहित निषाद, राकेश कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।
