फर्जी मुकदमा के सदमे से हुई पत्रकार की मौत, परिजनों का रो – रो कर बुराहाल
1 min readषड्यंत्र के तहत को बेटे को भेजा गया था जेल नहीं पहुंचा वरिष्ठ पत्रकार नीरज मिश्रा को मुखाग्नि देने
सुलतानपुर

मामला थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर पंचायत दोस्तपुर से जुड़ा हुआ है जहां पर नीरज मिश्रा हिंद मोर्चा समाचार पत्र में खबर लिखते थे बाद में अपनी छोटे बेटे उज्वल मिश्रा को दोस्तपुर से हिन्द मोर्चा समाचार पत्र में नियुक्त करा दिया। खबर को प्रमुखता से लिखने व भ्रष्टाचार को लगातार उजागर करने के कारण कई लोगों के नजर में आ गए और मौके की तलाश करने लगे। जैसे अवैध खनन, अवैध आरा मशीन,अवैध वसूली, गौ तस्करी, थाने पर दलाली, अपराधियों को संरक्षण देने, व अपराध को बढ़ावा देने, एवं पूर्व में रहे बेवाना थाना वर्तमान में थाना अध्यक्ष दोस्तपुर पंडित त्रिपाठी के खिलाफ बवाना थाना में मुकदमा अपराध संख्या 182/2022,दर्ज का भ्रष्टाचार का खुलासा करने के कारण चिढ़े हुए थे। सूत्र बताते हैं जिनके ऊपर आज भी जिला अंबेडकर नगर में मुकदमा गतिमान है। वहीं दूसरी तरफ नगर पंचायत दोस्तपुर में स्लॉटर हाउस की घोटाले की खबर को प्रकाशन करते ही अधिशासी अधिकारी सचिन कुमार पांडे व नगर पंचायत अध्यक्ष भ्रष्टाचार की जांच ना हो इससे पूर्व स्लॉटर हाउस की खबर दिनांक 9.2.2025 को प्रकाशन की जाती है उसके बाद गंभीर धाराओं में दिनांक 9.2. 2025 को मुकदमा अपराध संख्या 00 25/ 2025 एससी एसटी सहित नीरज मिश्रा व उज्जवल मिश्रा को अभियुक्त बनाते हुए उज्जवल मिश्रा को गिरफ्तार करके जिला जेल भेज दिया जाता है। बेटे के जेल जाने से सदमे में चले गये और दिन प्रति-दिन हालत बिगड़ती गई कई बार जिला अस्पताल व स्थानीय CHC दोस्तपुर अस्पताल अंबेडकर नगर जिला अस्पताल में इलाज कराया लेकिन ठीक नहीं हो सके और छोटे बेटे जेल से जमानत भी नहीं हो पाया। जिसके कारण हालत बिगड़ती गई और दिनांक 20.2.2025 को सांस में साथ को छोड़ दिया। जीव कोपार्जन चलाने के लिए ग्रामीण बैंक दोस्तपुर से संबंधित फ्रेंचाइजी दोस्तपुर में चलते थे कुछ माह पूर्व फ्रेंचाइजी भी ग्रामीण बैंक के मैनेजर ने बंद कर दिया था। जिससे माली हालत भी और गंभीर हो गई थी। पत्रकार समाज का आईना होता है। हर सुख दुख में पत्रकार खबर को प्रकाशन करता है और अपनी नैतिक जिम्मेदारी को निर्वहन करता है। लेकिन जब पत्रकार के ऊपर मुसीबत आती है तो सारे लोग सामाजिक संगठन से जुड़े व्यक्ति व अन्य राजनीतिक पार्टियों के द्वारा हाथ खड़ा कर दिया जाता है या क्यों? क्योंकि भ्रष्टाचार की आग जलते रहे या खुलासा करने पर पत्रकार घर परिवार को मौत के मुंह में धकेल दिया जाए। क्या यही जीरो टॉलरेंस नीति है। पत्रकार को धमकी देने पर ₹50000 जुर्माना और आसानी से जेल से जमानत न होने की एक दिखावा बनके रह गया है। अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों? पत्नी व बेटी व बडे प्राजंल मिश्रा का रो रो कर बुरा हाल है।
पत्रकारों की मांग
निष्पक्ष जांच हो पीड़ित पत्रकार के बेटे रिहाई और दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई हो। सूत्र
अजय त्रिपाठी
