कामाख्या धाम चौकी प्रभारी दिवाकर यादव लाइन हाजिर समेत 35 पुलिस कर्मियों के कार्यक्षेत्र में फेरबदल
1 min readवरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजकरन नैयर ने किया जिले में भारी फेरबदल
अयोध्या।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजकरन नैयर ने पुलिस विभाग में भारी-भरकम फेरबदल किया है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में 35 पुलिस कर्मी इधर से उधर हुए हैं। जिसमें बाबा बाजार थाने की कामाख्या धाम चौकी प्रभारी दिवाकर यादव को लाइन हाजिर किया गया।
कामाख्या धाम चौकी का इतिहासयहां प्रथम प्रभारी आशीष कुमार सिंह को छोड़कर सभी लाइन हाजिर ही हुए हैं बताते चलें कि इस चौकी की स्थापना को करीब दो वर्ष ही हुए हैं, यहां प्रथम प्रभारी के रूप में तैनात किए गए एसआई आशीष सिंह ही यहां स्थानांतरित होकर गए बाकी सब लाइन हाजिर हुए आशीष सिंह के बाद यहां के प्रभारी के रूप में थीरेंद्र कुमार आजाद आए थे वे भी लाइन हाजिर होकर ही यहां से बिदा हुए थे थीरेंद्र कुमार आजाद के बाद यहां गालीबाज एसआई गोविंद अग्रवाल की प्रभारी के रूप में तैनात किए थे बदतमीजी के कारण उनको भी लाइन हाजिर होकर ही यहां से बिदाई मिली गोविंद अग्रवाल के यहां के प्रभारी के रूप में एसआई दिवाकर यादव की तैनाती हुई और ये भी लाइन हाजिर होकर ही बिदा हो रहे हैं। सोचनीय विषय है कि इस चौकी के प्रथम प्रभारी को छोड़कर सब लाइन हाजिर होकर ही क्यों जाते हैं।
इसका एक अहम कारण है
यह की जिला मुख्यालय से ये पुलिस चौकी करीब 70 किलोमीटर दूर आदि गंगा गोमती के तट पर स्थित है भले ही नगर पंचायत होने के कारण यहां अधिकारियों का आना जाना रहता लेकिन कामाख्या धाम चौकी एक कमाऊ पुलिस चौकी है यहां क्या होता है आलाकमान को भी जल्दी से पता नहीं चलता यदि सोशल मीडिया व हमारे पत्रकार वंधु न हों तो यहां बहुत कुछ हजम हो जाए, करीब दो तीन महीने से कामाख्या धाम चौकी में पीड़ितों की सुनवाई नहीं हो रही थी और केवल और केवल पैसे कमाने की होड़ चल रही थी सिपाही से लेकर यहां के प्रभारी तक सबको एक ही उद्देश्य था,सच तो यह है कि इस चौकी पर तैनात सभी जवानों का तबादला आवश्यक है केवल उपनिरीक्षक सुरेंद्र चंद्र को छोड़कर। उपनिरीक्षक सुरेंद्र चंद्र केवल अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं बाकी लोग क्या करते हैं पहले ही लिखा जा चुका। यहां कुछ पीड़ितों ने लेन-देन को लेकर फोटो और वीडियो बनाने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। फिलहाल यह तो समझ में आ गया कि ये मां कामाख्या देवी का दरबार है और यहां अन्याय करने वाले को मां भगवती नहीं बख्शती हैं परिणाम सामने है यहां आने वाले तीन तीन प्रभारी लाइन हाजिर हो गए।
सच तो यह है कि प्रभारी निरीक्षक बाबा बाजार का भी तबादला आवश्यक
कारण अभी हाल ही में दो महिलाओं का मामला प्रकाश आया था एक को हारकर न्यायालय जाना पड़ा तो दूसरी का मामला आलाधिकारियों व भाजपा समर्थक दल के प्रदेश प्रभारी व एंटीक्रप्शन बोर्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुआ तब तक दूसरा मामला चंद्रामऊ की मोहिनी देवी का भी सामने आया इसमें भी उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामला दर्ज हुआ, पिछले बाबा बाजार थाना प्रभारी की इस प्रकार की लापरवाहियों की तलाश की जाए तो अनेकों ऐसी समस्याएं मिलेंगी जिनमें थाना प्रभारी ने मामला दर्ज नहीं किया, और जब मामले दर्ज न हों तो थाना खोलने का कोई औचित्य ही नहीं है या तो ये थाना बंद किया जाए या फिर ऐसे गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाने वाले अधिकारियों/ कर्मचारियों को विभाग से ही छुट्टी दे दिया जाए। फिर जो लोग थाना प्रभारी की लापरवाही से कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं उनका हर्जाना मैं खर्च बाबा बाजार थाना प्रभारी से दिलाया जाए, आखिर इनकी तैनाती दोषियों पर कार्यवाही करने के लिए है तो लापरवाही क्यों महोदय क्राइम ब्रांच से आए थे इस थाने के प्रभारी बनकर और क्राइम करने वालों पर ही कार्यवाही नहीं कर सकते। यदि एक नियम बन जाए कि कोई भी निरीक्षक उपनिरीक्षक अथवा सिपाही छः माह से अधिक एक थाने/चौकी पर न रहे तो कानून ब्यवस्था भी दुरुस्त रहेगी और भ्रष्टाचार पर भी नियंत्रण रहेगा, लेकिन थाने/चौकी के प्रभारियों पर तो अक्सर माननीय मेहरबान रहते हैं।इन माननीयों को वोट जनता देती है और ये मेहरबान सरकारी ड्यूटी पर तैनात लोगों पर होते हैं किसलिए केवल अपने चहेतों को बचाने अथवा अन्य लाभ दिलाने के चक्कर में, जिनके वोटों के बल पर नेताओं को कुर्सी मिलती है ये नेता उसी जनता के नहीं होते, लेकिन जनता दूसरों के बरगलाने में आ जाती है और चुनाव के समय फिर मतदान करके पुराने जनप्रतिनिधि को अपना प्रतिनिधि बना लेती है अपना पांच साल का पुराना रोना भूल जाती है ये भारत की जनता है भावना में बह जाती है।
