February 12, 2026

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पुस्तक समीक्षा–#बच्चों को कहानियों की झप्पी देता कथा संग्रह–दुर्गेश्वर राय–#

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पुस्तक समीक्षा

बच्चों को ‘कहानियों की झप्पी’ देता कथा संग्रह
• दुर्गेश्वर राय

कहानी एक ऐसी विधा है जिसके माध्यम से न केवल संस्कार, सद्चरित्र, मानवता, नैतिकता, परोपकार, सज्जनता, अनुशासन, सहनशीलता आदि सद्गुणों को बड़ी सरलता से बच्चों के अंदर रोपित किया जा सकता है बल्कि भाषा, इतिहास, भूगोल, विज्ञान, गणित आदि विषयों के तथ्यों को भी सहजता के साथ बच्चों को समझाया जा सकता है। बाल कहानी लिखते समय यदि कहानीकार थोड़ी सी सतर्कता बरतने के साथ बाल मनोभावों का ध्यान रखें तो वह कहानी बच्चों के मन मस्तिष्क में स्टेप बाई स्टेप उतरती चली जाती है। इसके साथ ही बच्चे न केवल कहानी से जुड़ते हैं बल्कि उससे मिली सीख को अक्षरशः अपने जीवन में उतारने लगते हैं। ऐसे में बाल मनोभाव के विभिन्न पक्षों से नित्यप्रति रूबरू होने और रोज नया अध्याय सीखने वाला शिक्षक यदि कहानी लिखने बैठ जाय तो फिर बात ही कुछ और होती है। उत्तराखंड की एक ऐसी ही नव प्रयोगधर्मी शिक्षिका इंदु पंवार द्वारा लिखित बाल कहानियों का लघु संग्रह है “कहानियों की झप्पी”।
कहानियों की झप्पी में नौ बाल कहानियां शामिल हैं। हर कहानी बाल मन के किसी कोने को स्पर्श करती है। ‘सेम का बीज’ कहानी बड़ी सहजता के साथ बच्चों को यह संदेश दे रही है कि यदि जीवन में हम उचित जगह का चुनाव कर लें तो हमारे कार्य स्वतः ही सिद्ध होते चले जाते हैं। उचित अनुचित के चुनाव की कला अगर बच्चे में आ जाए तो फिर क्या कहना। ‘प्रथम पुरस्कार’ के माध्यम से लेखिका ने बच्चों को अति आत्मविश्वास से बचने और निराशा को अपने ऊपर हावी न होने देने की सुंदर सीख दे रही हैं। ‘रिया और बिल्ली की दोस्ती’ एवं ‘खुशी का राज’ कहानियां एक तरफ जहां बच्चों को जीवों के प्रति दया एवं स्नेह के लिए जागरूक कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ समस्याओं का समाधान होने तक रिया की तरह धैर्य धारण करने की सलाह भी दे रही हैं। ‘दादी का चश्मा’ कहानी झुर्रियों वाली अनुभवी पीढ़ी और कोमल सी तीसरी पीढ़ी के नाजुक रिश्तों का ताना-बाना बुन रही है। ‘घर वापस चलते हैं’ कहानी में नन्ही सी चिड़िया और उसकी मां के बीच के वार्तालाप के माध्यम से शहरीकरण के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय चिंता को उजागर किया गया है तो वहीं अपने घर के महत्व को भी समझाया गया है। ‘सानू जरूर पढ़ने जाएगी’ और ‘दोस्ती’ कहानियां न केवल बालिका शिक्षा की चुनौतियों को उजागर कर रही हैं बल्कि उनके सहज समाधान भी प्रस्तुत कर रही हैं।
समय साक्ष्य प्रकाशन, देहरादून द्वारा पुस्तक को सुसज्जित करते हुए सुंदर फॉन्ट में छपाई की गई है जो सराहनीय है। प्रियंका जोशी के रेखाचित्रों ने कहानियों को बच्चों के लिए मोहक बना दिया है, कवर पृष्ठ चित्ताकर्षक है। संक्षेप में कहें तो इंदु पंवार की यह पुस्तक बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी है।

पुस्तक : कहानियों की झप्पी
लेखिका : इंदु पंवार
प्रकाशक : समय साक्ष्य, देहरादून
पृष्ठ : 27, मूल्य : ₹ 75

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सम्पर्क : समीक्षक प्राथमिक शिक्षा से जुड़े हैं। गोरखपुर, उ.प्र.
मोबा. : 7905664495

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