ग्राम पंचायत सचिव कुलदीप त्रिपाठी को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश
1 min readग्राम पंचायत सचिव कुलदीप त्रिपाठी को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश
गबन करने वाले भी विधिक नोटिस की धमकी देने लगे
अम्बेडकरनगर
पत्रकारिता करना या भ्रष्टाचार उजागर करना मुश्किल होता जा रहा है जब भी किसी भ्रष्टाचारी के खिलाफ कोई खबर छापो तो कानूनी नोटिस की धमकी मिल जाती है। भ्रष्टाचारी अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए तरह- तरह के हथकंडे अपनाने लगते हैं जैसे अभी 2 दिन से एक खबर चलाई जा रही है कुलदीप त्रिपाठी सचिव ग्राम पंचायत अमोला बुजुर्ग द्वारा ग्राम पंचायत अमोल बुजुर्ग में स्ट्रीट लाइट लगाने में फर्जीवाड़ा किया गया है। खबर चलने के बाद एक समाचार पत्र में कुलदीप त्रिपाठी के बयान और खंड विकास अधिकारी के बयान के आधार पर खबर छपी है कि सोशल मीडिया पर चलाई जा रही खबर फर्जी है। कुलदीप त्रिपाठी खबर के विरुद्ध न्यायालय के शरण में जाएंगे और खंड विकास अधिकारी ने बताया कि सोशल मीडिया पर आने वाली खबरों का संज्ञान नहीं लेते जब कोई लिखित में शिकायत आती है तो उसका संज्ञान लिया जाता है। कुलदीप त्रिपाठी तो स्वतंत्र है वह जहां चाहे जा सकते हैं। परंतु खंड विकास अधिकारी का क्या किया जाए जिसने खुद इसी प्रकरण में लिखित में बताया है कि उसके कार्यालय पत्रांक 295 दिनांक 13 सितंबर 2023 द्वारा ग्राम पंचायत सचिव कुलदीप त्रिपाठी को कारण बताओं नोटिस जारी कर 1 सप्ताह में अभिलेख की मांग की गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने भी अपने कार्यालय पत्रांक 3055 दिनांक 1 नवंबर 2023 द्वारा ग्राम पंचायत सचिव कुलदीप त्रिपाठी को कारण बताओं नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण की जानकारी जिला विकास अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी को भी बहुत अच्छी तरह से है। सबकी मिली भगत से यह गबन हुआ है अन्यथा कारण बताओ नोटिस जारी करने के 3 महीने बीत जाने के बाद भी कार्यवाही न हो ऐसा कैसे संभव है। पूरा प्रकरण यह है कि ग्राम पंचायत अमोला बुजुर्ग में वित्तीय वर्ष 2022_23 में लाखो रुपए की स्ट्रीट क्रय की गई है। जिसमें शासनादेश एवं पंचायती राज निदेशालय के आदेशो के विरुद्ध क्रय कर शासकीय धन का गबन किया गया है। श्री मनोज सिंह अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश द्वारा जारी आदेश संख्या 1633 दिनांक 10 अगस्त 2022 में स्पष्ट निर्देश दिया था कि एल.ई.डी. लाइट ऑटोमेटिक सेंसर वाली लगाई जाती है। जिससे लाइट स्वतः स्विच ऑन व आफ हो जाए। फिर भी ग्राम पंचायत सचिव ने बिना सेंसर वाली लाइट क्रय कर शासनादेश का उल्लंघन किया है। जी दंडनीय अपराध है। श्री मनोज कुमार झा निदेशक पंचायती राज उत्तर प्रदेश ने अपने पत्र संख्या 42713 दिनाक 26 जून 2021 द्वारा शासनादेश में उल्लेखित ब्रांड की ही एलइडी स्ट्रीट लाइट लगाए जाने हेतु नियत कंपनियों से वार्ता के उपरांत उनके अधिकृत डीलर की सूची सुलभ संदर्भ हेतु प्रेषित की थी। ग्राम पंचायत सचिव श्री कुलदीप त्रिपाठी ने निदेशालय द्वारा अधिकृत डीलरों की सूची में दिए गए नाम में से किसी भी डीलर से लाइट क्रय नहीं किया है उन्होंने लोकल फर्म से लाइट क्रय कर लगाई है जो निदेशालय के आदेश का उल्लंघन है। 1 लाख से ऊपर की लाइट क्रय की गई है इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी नहीं अपनाई। अगस्त 2022 से ही लाइट जला रहे हैं परंतु बिजली का कनेक्शन भी नहीं लिया यह भी दंडनीय अपराध है। इसमें भी बिजली विभाग द्वारा जांच कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जानी चाहिए थी। परंतु अभी तक कुछ नहीं हुआ। इतनी सारी अनियमितताएं गबन भ्रष्टाचार के बाद भी ग्राम पंचायत सचिव धमकी देता है कि न्यायालय की शरण में जाकर कानूनी नोटिस भेजेगा। खंड विकास अधिकारी कहते है लिखित में शिकायत मिलेगी तो जांच करेंगे। जिससे लगता है कि सचिव को उच्च अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है वह कुछ भी करें कोई अधिकारी उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं करेगा वह अपने स्तर से न्यूज़ चलाने वाले या खबर छापने वालों के विरुद्ध न्यायालय से नोटिस भेजकर उनको धमकी देता रहे देखते हैं इंतजार है कब विधिक नोटिस आए और उसका जवाब दिया जाए। मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला पंचायत राज अधिकारी को तो अब खबर का संज्ञान लेकर जांच पूरी कर भ्रष्टाचारी सचिव कुलदीप त्रिपाठी के विरुद्ध कार्रवाई कर ही देनी चाहिए। क्योंकि भ्रष्टाचार, अनियमितता और शासनादेशो का उलंघन तो हुआ है। जिसपर कार्यवाही न करने से यह सिद्ध हो जाएगा की मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायत राज अधिकारी भ्रष्टाचारी सचिव से रिश्वत लेकर उसको संरक्षण दे रहे हैं और जनपद में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

