August 21, 2026

Awadh Speed News

Just another wordpress site

कन्हैया लाल इंटर कॉलेज में नाबालिग छात्रों से “उठक-बैठक”, वीडियो वायरल

1 min read
Spread the love

स्वतंत्रता दिवस से 2 दिन पहले की घटना, कुर्सी पर बैठे शिक्षक और कान पकड़े छात्र

गोंडा/कर्नलगंज। देश के राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस से ठीक 2 दिन पहले कर्नलगंज नगर के प्रतिष्ठित कन्हैया लाल इंटर कॉलेज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में कुछ नाबालिग छात्रों से शिक्षकों द्वारा कान पकड़कर उठक-बैठक लगवाई जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अध्यापक कुर्सी पर बैठे हैं और छात्र नीचे खड़े होकर सजा काट रहे हैं। वायरल वीडियो क्लिप में साफ देखा जा सकता है कि कालेज परिसर में कई छोटे-छोटे छात्र लाइन में खड़े हैं। सभी ने दोनों हाथों से कान पकड़ रखे हैं और उठक-बैठक कर रहे हैं। सामने कुर्सियों पर कुछ शिक्षक बैठकर उन्हें देख रहे हैं। वीडियो 13 अगस्त 2026 सुबह 10 बजकर 8 मिनट का बताया जा रहा है,जो जीपीएस मैप कैमरे से प्रदर्शित हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार 13 अगस्त को कर्नलगंज में बीजेपी विधायक अजय सिंह के द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली गई थी,जिसमे कन्हैयालाल इंटर कालेज सहित कई विद्यालयों के छात्र/छात्राओं व सरकारी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों को शामिल किया गया था। इनमें से ही अनेकों छात्र यात्रा में साथ साथ गये थे और कई छात्र बीच रास्ते से ही वापस कालेज लौट आये थे, इसी वजह से दंड स्वरूप उनसे कान पकड़कर उठक-बैठक लगवाई जा रही थी। जिसकी पुष्टि गेट के बाहर खड़े छात्रों द्वारा भी की जा रही है,जो वीडियो में देखा व सुना जा सकता है।

अभिभावकों और शिक्षाविदों में आक्रोश

वीडियो सामने आते ही अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है- “आजादी के पर्व से पहले बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार शर्मनाक है। क्या यही है नई शिक्षा नीति में सम्मान?” बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि नाबालिग बच्चों को शारीरिक/मानसिक दंड देना आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009) और जेजे एक्ट किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम, 2015) के तहत कानून दंडनीय अपराध है।
फिलहाल मामले में अभी तक कन्हैया लाल इंटर कॉलेज प्रबंधन या संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अथवा जिला विद्यालय निरीक्षक गोंडा की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कानूनी प्रावधान-

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 17 और जेजे एक्ट किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण अधिनियम, 2015) के तहत स्कूल में किसी भी बच्चे को शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न प्रतिबंधित है। दोषी पाए जाने पर शिक्षक और प्रबंधन दोनों पर कार्रवाई हो सकती है।

अब सवाल ये हैं कि 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व से पहले बच्चों को इस तरह सजा क्यों? स्कूल में सीसीटीवी और शिकायत पेटी क्यों नहीं? बीएसए और डीआईओएस कब करेंगे जांच और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी।

महादेव मौर्या

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *