पुलिस ने दी थी हिदायत—फिर भी शाम होते-होते चटकी लाठियां, कई घायल, पुलिस की एक पक्षीय कार्रवाई पर उठे सवाल
1 min readबीकापुर में पुलिस को पहले से थी खूनी संघर्ष की आशंका, फिर भी नहीं टला बवाल!
शिकायत से लेकर एसएसपी के पीआरओ तक पहुंची सूचना, मौके पर पहुंची पुलिस ने दी थी हिदायत—फिर भी शाम होते-होते चटकी लाठियां, कई घायल;
वायरल वीडियो ने खोली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालों की परतें यही ही नहीं एक वीडियो की माने तो थाना प्रभारी ने चौकी प्रभारी को कहा तुम कुछ मत करना इस पूरे मामले को हम स्वयं देखेंगे
बीकापुर/अयोध्या

बीकापुर कोतवाली क्षेत्र की मोतीगंज चौकी अंतर्गत ग्राम पंचायत जोहन, मजरे चितई मिश्र के पुरवा में कथित अवैध निर्माण को लेकर हुआ विवाद अब पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे लाठी-डंडों से मारपीट के वीडियो ने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया है, वीडियो में कुछ लोग खुलेआम लाठियां भांजते नजर आ रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ मारपीट का नहीं, बल्कि यह है कि जब विवाद की आशंका पहले ही पुलिस और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंच चुकी थी, तो आखिर हिंसा को रोका क्यों नहीं जा सका?
शिकायत पहुंची SDM और थाना प्रभारी तक
मिली जानकारी के मुताबिक 7 अगस्त को एक पक्ष ने उपजिलाधिकारी बीकापुर और थाना प्रभारी को लिखित शिकायती पत्र देकर कथित अवैध निर्माण रुकवाने की मांग की थी।
शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों, थाना प्रभारी और हल्का लेखपाल को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
इसके बाद हल्का लेखपाल और पुलिस मौके पर पहुंचे तथा निर्माण न करने की हिदायत दी।
लेकिन आरोप है कि पुलिस-राजस्व टीम की मौजूदगी और हिदायत के बावजूद विवादित स्थल पर बुनियाद भरने का काम चलता रहा, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया।
पुलिस को बार-बार दी गई सूचना, फिर भी नहीं थमा तनाव!
सबसे गंभीर सवाल यहां से शुरू होता है।
जानकारी के मुताबिक एक पक्ष की ओर से पीआरबी और स्थानीय पुलिस को लगातार सूचना दी जा रही थी कि मौके पर कभी भी मारपीट हो सकती है।
इतना ही नहीं, मामले की सूचना वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पीआरओ तक फोन के माध्यम से पहुंचाए जाने की बात भी सामने आ रही है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पीआरओ की ओर से नजदीकी थाना पुलिस से संपर्क किए जाने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई।
इसके बावजूद कुछ ही समय बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
आखिर पुलिस की तैयारी कहां थी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब विवाद की सूचना पहले से थी,
जब राजस्व और पुलिस टीम मौके पर जा चुकी थी,
जब दोबारा विवाद की आशंका जताई जा रही थी,
तो फिर पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या पुलिस ने दोनों पक्षों को पर्याप्त रूप से पाबंद किया था?
क्या मौके की स्थिति की निगरानी की गई?
क्या सूचना मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया?
और यदि नहीं भेजा गया तो क्यों?
इन सवालों का जवाब अब पुलिस प्रशासन को देना होगा।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई जांच की जरूरत
घटना के बाद वायरल वीडियो में लाठी भांजते दिखाई दे रहे तीन लोगों की पहचान और उनकी भूमिका भी जांच का अहम बिंदु बन गई है।
हालांकि वायरल वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्तियों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी पुलिस की ओर से नहीं हुई है, लेकिन वीडियो ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि घटना के दौरान मौके पर कौन-कौन लोग मौजूद थे और हिंसा की शुरुआत किसने की?
एक पक्ष पर कार्रवाई, दूसरे पक्ष की भूमिका पर भी उठे सवाल
खबर लिखे जाने तक मिली जानकारी के अनुसार पुलिस द्वारा एक पक्ष के लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आ रही है, जबकि दूसरे पक्ष की ओर से भी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी है।
ऐसे में पुलिस की निष्पक्षता की असली परीक्षा अब शुरू होती है।
यदि दोनों पक्षों के बीच विवाद था तो कार्रवाई भी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों पक्षों की भूमिका के अनुरूप होनी चाहिए।
अब एसएसपी से उठ रहे सीधे सवाल
बीकापुर की इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।
सूचना पहले मिली या कार्रवाई बाद में?
खतरे की आशंका पहले जताई गई या पुलिस जागी घटना के बाद?
विवाद बढ़ने से पहले क्या पर्याप्त निरोधात्मक कार्रवाई हुई?
वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान कब होगी?
और अगर पुलिस को पहले से सब कुछ पता था, तो फिर लाठियां चलने की नौबत आखिर क्यों आई?
अब निगाहें अयोध्या पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
क्योंकि मामला महज दो पक्षों के विवाद का नहीं, बल्कि समय रहते मिली सूचना के बावजूद कानून-व्यवस्था बिगड़ने से जुड़े गंभीर सवालों का है।
ब्यूरो रिपोर्ट।
