मुख्यमंत्री योगी के आगमन की पूर्व तैयारी में कटे हरे-भरे पेड़; पर्यावरण प्रेमियों और छात्रों में भारी आक्रोश
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जनपद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगामी 9 जुलाई के प्रस्तावित कार्यक्रम की पूर्व तैयारी के नाम पर स्थानीय प्रशासन द्वारा की जा रही पेड़ कटाई पर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। पंडित जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय से कालू कुआँ मार्ग के किनारे लगे कुछ हरे-भरे पेड़ों को बिना किसी ठोस कारण के मशीनों से जड़ से काट दिया गया है ।स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि जिन पेड़ों को काटा गया है, वे न तो जनसभा स्थल के बीच में थे और न ही वहां कोई हेलीपैड बनाया जा रहा है। ये पेड़ सड़क और मैदान के किनारे सुरक्षित खड़े थे, जिनसे किसी भी प्रकार का आवागमन बाधित नहीं हो रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्रशासन के अधिकारी मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री जी स्वयं पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण के कड़े निर्देश दे चुके हैं फिर ये उनके आदेशों को अनदेखा क्यों कर रहे है।बांदा के पर्यावरण प्रेमी यश त्रिवेदी ने इसे प्रकृति के साथ ‘अनैतिक कृत्य’ करार देते हुए कहा कि भीषण गर्मी और विश्व में सबसे उच्च तापमान झेल चुके बांदा में पेड़ों की हत्या भविष्य के लिए ऑक्सीजन संकट पैदा करेगी। पूर्व बीजेपी जिला कार्यकारणी सदस्य बाबू राम निषाद ने इसे मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने की साजिश बताया। वहीं, अधिवक्ता व छात्र नेता लव सिन्हा ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्वागत वृक्षारोपण से होना चाहिए था, न कि पेड़ों की बलि देकर।’बांदा जल जंगल पहाड़ बचाओ अभियान’ से जुड़े सदस्य और समाजसेवि ओम राजपूत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई नहीं की गई, तो पर्यावरण प्रेमी और बांदा की जनता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होगी। मामले की जानकारी वन विभाग , महाविद्यालय के प्राचार्य को भी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है इसकी शिकायत संबंधित उच्च अधिकारी और वन मंत्री जी को भी दी जाएगी। इस विरोध में शिवा शुक्ला, कार्तिक आनंद, अतुल साहू, हर्ष श्रीवास्तव, पवन अवस्थी, अभिषेक शुक्ला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और छात्र ने आक्रोष व्यक्त किया ।सभी ने एक स्वर में मांग की है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
