गोमती में मछलियों की मौत पर गौ रक्षा वाहिनी ने उठाई आवाज, दोषियों पर कार्रवाई व जलीय जीवों की सुरक्षा की मांग
1 min read
सुल्तानपुर।
पवित्र श्री सीताकुण्ड धाम स्थित आदि गंगा माँ गोमती में बड़ी संख्या में मछलियों के मृत मिलने की घटना पर गौ रक्षा वाहिनी ने गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन के प्रदेश प्रभारी सर्वेश कुमार सिंह ने इसे पर्यावरण, जलीय जैव विविधता और जनआस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि माँ गोमती केवल एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। नदी में सैकड़ों मछलियों का मृत पाया जाना इस बात का संकेत है कि जल प्रदूषण, रासायनिक अपशिष्ट अथवा ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इसकी जांच और रोकथाम नहीं की गई तो नदी के अन्य जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
गौ रक्षा वाहिनी के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मत्स्य विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि गोमती नदी के जल का तत्काल नमूना लेकर वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाए तथा मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए। यदि किसी व्यक्ति, संस्था अथवा उद्योग द्वारा नदी में प्रदूषित अथवा जहरीले पदार्थ छोड़े गए हैं तो उनके विरुद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की जाए।
प्रदेश प्रभारी सर्वेश कुमार सिंह ने जलीय जीवों के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने मांग की कि नदी में नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए, प्रदूषण फैलाने वाले नालों और स्रोतों की पहचान कर उन्हें बंद किया जाए, नदी तटों पर जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा मत्स्य विभाग द्वारा जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी दल गठित किया जाए। साथ ही नदी में ऑक्सीजन स्तर बनाए रखने और पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा के लिए विशेषज्ञों की सलाह पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48(क) एवं 51(क)(ग) के अनुसार पर्यावरण और वन्य जीवों का संरक्षण प्रत्येक नागरिक और सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए माँ गोमती और उसमें रहने वाले जलीय जीवों की रक्षा के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से कार्य करना चाहिए।
गौ रक्षा वाहिनी ने चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तथा मछलियों एवं अन्य जलीय जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो संगठन विधिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से जनहित में व्यापक अभियान चलाने को बाध्य होगा। संगठन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे नदी में कचरा, प्लास्टिक या अन्य प्रदूषक पदार्थ न डालें और माँ गोमती को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।

