चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग से रातोंरात गायब हुए हरे पेड
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टेंडरिंग फर्म ने एन एचआई और वन विभाग पर मिलीभगत कर पेंड गायब करने का लगाया आरोप
अयोध्या
भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकर की की राम नगरी अयोध्या में चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के र्निमाण में यूपी सरकार को करोड़ों रुपये राजस्व की हानि की संभावना बढ़ गई है राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 227 बी 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है 5 जनपदों से होकर गुजारने वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर एनएचआई द्वारा किसानों के वृक्षों और जमीन का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। जिसके बाद वन निगम द्वारा हजारों पेड़ों की टेंडरइंग की गई आनलाईन प्रक्रिया में भाग लेने वाले अधिकतम् बोली दाताओं को पेंडो के उठाने के लिए पैसे जमा कराने के बाद 11मई तक पेड़ों को उठाने की समयावधि तय की गई 18 जनवरी को हुई टेंडरइंग के बाद अब तक वन विभाग के द्वारा एन ओसी नहीं देने के कारण संबंधित फर्मों द्वारा पेड़ों की कटाई नहीं शुरू हो सकी जबकि अमानीगंज स्थित गंगा ट्रेडर्स ने लगभग 27 लाख रुपये जमा भी कर दिया है इसी तरह जिले की पांचो वनरेंजो में भी पेड़ों की उठान नहीं की जा सकी बताया गया है कि पांच जनपदों की विभिन्न वन रेंज के हिसाब से अलग अलग टेंडरइंग की गई है जिसके बदले में करोड़ों रुपये का राजस्व वन निगम के खाते में जमा है उठान नहीं होने की दशा में सरकार को पैसे वापस करने पड सकते हैं। गंगा टेडर के प्रोपराइटर आशुतोष सिंह ने आज एन एच 227 चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर पत्रकारों से बात करते हुए एन एच आई और वन विभाग पर मिली भगत कर रातोंरात पेड़ों को गायब किये जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह पिछले तीन महीने से वन विभाग के चक्कर लगा रहे हैं और एन ओसी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन विभाग के लोग टालमटोल करने में लगे हैं जबकि राजमार्ग र्निमाता कंपनी और वन विभाग के लोगों ने रातोंरात पेड़ों गायब कर दिया 1609 पेड़ों में से आधे पेड गायब है और उनके ढूँढ मौके पर पडे हैं उन्होंने ये भी कहा कि मामले को लेकर अब उनकी फर्म हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।
वहीं दूसरी तरफ अयोध्या जनपद के डीएफओ राम अनुज त्रिपाठी से जब इस मामले में बात की गई तो उनका कहना था कि मामला वन निगम से जुडा है, लेकिन पेड़ों के गायब होने के सवाल पर वो कोई उत्तर नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि यदि पेड़ों को गायब किया गया है तो जांच कर एफआईआर दर्ज कराई जायेगी जबकि उत्तर प्रदेश वन निगम के चीफ कंजरवेटर शेष नारायण मिश्र का इस मामले में कहना है कि जिन लोगों ने पेड़ों को खरीदा है वन विभाग उन को र्निधारित शुल्क लेकर परमिट जारी करेगा यदि इसमें कोई अडचन होगी तो उनका विभाग उसे दूर करने का प्रयास करेगा।
वहीं गंगा टेडर की ओर से मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत में भी विभाग ने एक दूसरे पर टालने की बात करते हुए टालमटोल रवैया अपनाया है
अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कारवाई करती है अपने राजस्व का नुकसान करते हुए पैसे वापस करेगी य संवधित विभाग के लापरवाह लोगों पर कारवाई करती है।

