राजस्थान का ‘संगठन शिल्पी’ अब बंगाल में बना ममता के दुर्ग की चुनौती
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धौलपुर

राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री मोतीलाल मीणा आज भारतीय राजनीति में ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ का दूसरा नाम बन चुके हैं। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की प्रचंड जीत के पीछे उनकी रात-दिन की अथक मेहनत और सर्वाधिक प्रवास का रिकॉर्ड एक मिसाल है। प्रदेश उपाध्यक्ष और महामंत्री रहते हुए उन्होंने संगठन को गांव-ढाणी तक जीवित किया।
प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक के रूप में मोतीलाल जी ने राजस्थान को देश में प्रथम स्थान पर पहुंचाया। प्रदेश के 52,000 में से 40,000 बूथों पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्होंने जो संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया, उसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी।
वही ऊर्जा अब पश्चिम बंगाल की धरती पर दिख रही है। ममता बनर्जी के गृह जिले दक्षिण कोलकाता में मीणा ने रणनीतिक चातुर्य से विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर दी है:
त्रिदेव कार्ययोजना: राष्ट्रीय नेतृत्व के ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ मंत्र को धरातल पर उतारते हुए हर बूथ पर अभेद्य घेराबंदी की है।
सामाजिक सेतु: बांग्लादेश से आए मतुआ समुदाय के शरणार्थियों, हिंदी भाषियों और बंगला भाषी मतदाताओं को एक सूत्र में पिरोकर उन्होंने अटूट विश्वास का सेतु बनाया है।
राजस्थान की मिट्टी का यह लाल आज बंगाल में ममता के प्यादों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। लगातार प्रवास, संवाद और कार्यकर्ताओं में जोश भरने की उनकी कला ने दक्षिण कोलकाता के राजनीतिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है। राजस्थान का अनुभव और बंगाल का संकल्प—मोतीलाल मीणा का यह संगम भाजपा को बंगाल में नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
प्रवास का कीर्तिमान: प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए, राजस्थान के कोने-कोने में सर्वाधिक प्रवास करने का रिकॉर्ड श्री मीणा के नाम दर्ज है।
बूथ स्तर पर सक्रियता: उन्होंने केवल राजधानी में बैठकर योजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि रेगिस्तान की तपती धूप और दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना कार्यकर्ताओं के बीच जाकर जोश भरा, जिसका सुखद परिणाम आज राजस्थान में भाजपा सरकार के रूप में सबके सामने है।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की प्रचंड वापसी के पीछे जिन रणनीतिकारों ने पर्दे के पीछे रहकर दिन-रात एक किया, उनमें मोतीलाल मीणा का नाम अग्रिम पंक्ति में है।
