प्रसूता कलेवा योजना अचानक बंद करने के आदेश से मचा विवाद, SHG महिलाओं का रोजगार संकट में,
1 min readधौलपुर राजस्थान।
जिले के जिला चिकित्सालय में संचालित प्रसूता कलेवा योजना को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी द्वारा अचानक जारी आदेश में 1 अप्रैल 2026 से योजना को तत्काल प्रभाव से बंद करने की बात कही गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि महामाया स्वयं सहायता समूह (SHG) द्वारा योजना का संचालन जारी रखा गया तो किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा।
यह योजना वर्ष 2010-11 में राजस्थान सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से शुरू की गई थी, जिसे बाद में वर्ष 2014 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत स्वास्थ्य विभाग को स्थानांतरित कर दिया गया। योजना का मुख्य उद्देश्य प्रसूताओं को अस्पताल में नि:शुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना था, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सके और कुपोषण से बचाव हो।
योजना के संचालन के लिए राज्य सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर स्वयं सहायता समूहों (SHG) का चयन बिना टेंडर प्रक्रिया के महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से किया था। वर्ष 2010-11 से चयनित SHG आज तक इस योजना का सफल संचालन कर रही हैं।
लेकिन अब जिला चिकित्सालय धौलपुर में बिना किसी पूर्व सूचना या उच्च स्तर की स्वीकृति के योजना को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस निर्णय की जानकारी न तो राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग और न ही NHM को दी गई है।
महामाया SHG से जुड़ी महिलाओं का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से भुगतान में देरी का सामना करना पड़ा। करीब 6 महीने तक भुगतान रोका गया, जिससे वे आर्थिक रूप से परेशान रहीं। उनका कहना है कि यह कदम उन्हें काम छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश का हिस्सा है।
महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि योजना को तुरंत पुनः शुरू किया जाए और बकाया भुगतान समय पर किया जाए, ताकि उनका रोजगार सुरक्षित रह सके और प्रसूताओं को मिलने वाली पोषण सुविधा भी बाधित न हो सके।
विजय कुमार शर्मा ब्यूरो

