भागवत कथा के समापन पर भावुक हुए श्रद्धालु, भगवान की महिमा सुन भक्त हुए भाव विभोर
1 min readधौलपुर राजस्थान।
भागवत कथा के समापन पर भावुक हुए श्रद्धालु, भगवान की महिमा सुन छलके भक्तों के नयन l

मंचकुण्ड रोड स्थित परशुराम सेवा सदन में चल रही आठ दिवसीय ज्ञान यज्ञ का आज हुआ ‘एकादशी उद्यापन’ और पूर्णाहूति।
धौलपुर।
मंचकुण्ड रोड स्थित परशुराम सेवा सदन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं एकादशी उद्यापन महोत्सव के अंतिम चरणों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा के सातवें दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता स्वामी श्री मानस प्रपन्न भानुदेवाचार्य जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं का रसास्वादन कराया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने जब भगवान की 16108 रानियों का प्रसंग सुनाया, तो पंडाल भक्तिमय माहौल में डूब गया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान ने दुखों के सागर में डूबे अपने भक्तों को उबारा और उनके जीवन में खुशियों का संचार किया।कथा के दौरान जब स्वामी श्री मानस प्रपन्न भानुदेवाचार्य जी महाराज ने कृष्ण-सुदामा मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया, तो पूरा पांडाल भाव-विभोर हो गया। महाराज श्री ने वर्णन किया कि कैसे दरिद्रता से जूझ रहे सुदामा जब अपने सखा द्वारकाधीश से मिलने पहुंचे, तो भगवान कृष्ण ने लोक-लाज छोड़कर नंगे पैर दौड़ते हुए अपने मित्र को गले लगाया।
“देखि सुदामा की दीन दसा, करुना करिके करुनानिधि रोये…”
जब कथा व्यास ने बताया कि भगवान ने सुदामा के पैर धोने के लिए जल की आवश्यकता भी नहीं समझी और अपने आंसुओं से ही मित्र के चरण पखार दिए, तो पंडाल में मौजूद श्रद्धालुओं की आंखों से भी अश्रुओं की धारा बह निकली। इस प्रसंग के माध्यम से बताया गया कि भगवान धन-दौलत के नहीं, बल्कि केवल प्रेम और अटूट विश्वास के भूखे हैं।
कथा व्यास ने जीवन में सत्संग की महत्ता बताते हुए कहा कि करोड़ों जन्मों के पुण्य उदय होने पर ही श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करने का अवसर प्राप्त होता है। परीक्षित बने श्रीमती कुसुम एवं सतीश शर्मा ने सपत्नीक भागवत पोथी और व्यासपीठ का पूजन किया। कथा के इस अवसर पर श्रीमती उर्मिला शर्मा, रामअवतार शर्मा, विशंभर दयाल शर्मा, कुशल शर्मा, राजेंद्र शर्मा, सुनील, संजय, हरेंद्र,निर्मला, कांता प्रसाद शर्मा, श्रीमती रचना शर्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ थी। और कथा के अंत में प्रसाद का वितरण किया गया।
21 फरवरी से शुरू हुए इस आठ दिवसीय महोत्सव का शनिवार, 28 फरवरी को एकादशी उद्यापन और पूर्णाहूति के साथ समापन होगा। संगीत मय श्रीमद् भागवत कथा आयोजन के परीक्षित श्रीमती कुसुम एवं सतीश शर्मा ने सभी धर्मप्रेमियों से समापन समारोह में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ उठाने की अपील की है।
ब्यूरो विजय शर्मा
