भगवान के नाम संकीर्तन से ही संभव है दुखों का निवारण :- भानुदेवाचार्य महाराज
1 min readधौलपुर राजस्थान ।
धौलपुर मचकुंड रोड परशुराम सेवा सदन में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान कृष्ण का हुआ नामकरण संस्कार

मचकुण्ड रोड स्थित परशुराम सेवा सदन में आयोजित हो रही संगीत मय श्रीमद् भागवत रस महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास स्वामी श्री मानस प्रपन्ना भानुदेवाचार्य जी महाराज (श्रीधाम वृंदावन) ने अपनी अमृतमयी वाणी से भक्तों को भावविभोर कर दिया।
कथा के दौरान महाराज श्री ने ‘पूतना वध’ के प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि जब जीवन में कोई दुख या कष्ट आए, तो हमें विचलित होने के बजाय भगवान की शरण लेनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हरि नाम का संकीर्तन” ही वह अमोघ शक्ति है जो मनुष्य के बड़े से बड़े संकट को दूर कर सकती है। दुःख में केवल भगवान ही हैं जो साथ देते हैं और कष्टों का निवारण करते हैं।
महाराज जी ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि आज के दौर में हमें अपने पूर्वजों द्वारा दिए गए संस्कारों को कभी नहीं भूलना चाहिए। संस्कारवान व्यक्ति ही धर्म और समाज की रक्षा कर सकता है।
कथा के पांचवें दिन भगवान श्री कृष्ण और दाऊजी के ‘नामकरण संस्कार’ का प्रसंग सुनाया गया। गर्गाचार्य जी द्वारा भगवान के नामकरण की लीला का वर्णन सुन भक्त आनंदित हो उठे। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु जमकर थिरके। महाराज श्री ने बताया कि जो भी सच्चे मन से भगवान के नाम का जाप करेगा, उसका भाग्य प्रबल हो जाएगा।
कथा के मुख्य यजमान (परीक्षित) श्रीमती कुसुम एवं सतीश शर्मा ने व्यासपीठ का पूजन कर आरती उतारी। इस अवसर पर श्री श्री 1008 अवधूत पागल बाबा, श्रीमती उर्मिला शर्मा, राम अवतार शर्मा, कुशल शर्मा, संजय शर्मा एवं बड़ी संख्या में क्षेत्र के श्रद्धालु मौजूद रहे और प्रसादी ग्रहण की। यह कथा आगामी 28 फरवरी तक निरंतर जारी रहेगी।
विजय कुमार शर्मा ब्यूरो राजस्थान
