12000 की आबादी वाले इलाके के लोगों को अब बाढ़ में नही होगी समस्या, लोगों में खुशी की लहर
1 min read12000 की आबादी वाले इलाके के लोगों को अब बाढ़ में नही होगी समस्या
योगी सरकार इस इलाके के लोगों ने बनवाने जा रही है एक लघु सेतु
बरसात में केन नदी में बाढ़ आने से लोगों को होती है परेशानी
नाव के सहारे लोगों को करना पड़ता है आवागमन
बांदा-बहराइच राजमार्ग के चहितारा-पचुल्ला मार्ग पर बनेगा लघु सेतु
बांदा

बांदा के बहराइच बांदा राजमार्ग के चहिरता पचुल्ला मार्ग में योगी सरकार बरसात के दिनों में केन नदी में आने वाली बाढ़ से लोगों को हो रही परेशानी से निजात दिलाने जा रही है। और एक लघु सेतु का निर्माण कराने जा रही है। बरसात के दिनों में नाव के सहारे लोगों को यहां पर आवागमन करना पड़ता है और लगभग 12000 की आबादी प्रभावित होती है। इसके लिए टेंडर भी हो गया है और फरवरी के महीने से काम शुरू हो जाएगा। और लगभग 3 करोड रुपए की लागत से लघु सेतु का यहां पर निर्माण कराया जाएगा।
बरसात के दिनों में 10000 की आबादी का आवागमन हो जायेगा सुगम
चहितारा पचुल्ला मार्ग में बने
बांदा बहराइच मार्ग से चहितारा पचुल्ला मार्ग के किलोमीटर 6 में स्थित रपटे के स्थान पर 3×15 मीटर स्पान का लघु सेतु का निर्माण कार्य फरवरी के महीने से शुरू हो जाएगा। यह मार्ग ग्रामीण क्षेत्र का मार्ग है जिसका कैरिज वे 3.75 मीटर है। और इस मार्ग पर 1000 एम एम 11 रो में 27 मीटर में रपटा पूर्व से निर्मित है। और बरसात के समय में केन नदी के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी हो जाने के कारण मार्ग की 1.350 किलोमीटर लंबाई जलमग्न हो जाती है। जिसके फलस्वरूप आसपास के गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट जाता है। तथा नाव द्वारा ही आवागमन संभव हो पता है। और पहले से बने रपटे के स्थान पर अब 3×15 मीटर स्पोन के लघु सेतु का निर्माण होना प्रस्तावित है। जिसके बन जाने के बाद बरसात के दिनों में भी जिला मुख्यालय से यहां के लोगों का संपर्क सुगम हो जाएगा और आसपास के गावों की लगभग 12000 की आबादी को सुविधा हो जाएगी।
कार्य प्रारंभ होने के एक साल में लघु सेतु के निर्माण का कार्य हो जाएगा पूरा
अधिशाषी अभियंता सीडी 2 भूपेश कुमार सोनकर ने बताया कि लगभग 3 करोड रुपए की लागत से लघु सेतु का निर्माण कार्य प्रस्तावित है। और इसके लिए टेंडर भी हो गया है और मुख्यालय से स्वीकृति फरवरी के महीने में मिल जाएगी। जिसके बाद लघु सेतु के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा जिसे 1 साल में पूरा करने का लक्ष्य है। और लघु सेतु के निर्माण होने के बाद इस क्षेत्र के लोगों को बरसात के दिनों में होने वाली परेशानी को नहीं उठाना पड़ेगा और आवागमन सुगम हो जाएगा।
