दो अलग अलग तहसील में संपन्न हुआ संत रामपाल जी महाराज का विशाल सत्संग
1 min readराजस्थान।

झालावाड़ जिले की मनोहरथाना तहसील के गांव माधोपुरिया और पिड़ावा तहसील के गांव रायपुर में हुआ विशाल सत्संग में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब — रविवार को संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में अद्वितीय आयोजन
जहां आमतौर पर रविवार को लोग आराम करते हैं, छुट्टी मनाते है, वही परिवार संग घूमने-फिरने निकलते हैं, वहीं राजस्थान के झालावाड़ जिले की दो तहसील के ग्राम माधोपुरिया और ग्राम रायपुर में कुछ अलग ही दृश्य देखने को मिला। संत रामपाल जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित विशाल सत्संग में हजारों श्रद्धालुओं ने कड़ी धुप व भीषण गर्मी में सत्संग की अमृत वर्षा का आनंद लेते नजर आए श्रद्धालु सत्संग में भाग लेकर यह प्रमाणित कर दिया कि सच्चे ज्ञान की प्यास, आराम और मनोरंजन से कहीं ऊपर है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस सत्संग में भोजन और पेय पदार्थों को भी परमात्मा से जोड़कर परोसा गया — जैसे “बिस्कुट राम”, “चाय राम”, “जल राम”। यह परंपरा दर्शाती है कि संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी हर क्रिया को ईश्वर भक्ति में समर्पित करते हैं।
उत्कृष्ट व्यवस्था और सेवा भाव:
सत्संग स्थल पर पहुँचते ही सबसे पहले जूता घर में जूतों को बेहद सलीके से बैग में रखवाया गया — पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ। हर सेवक का व्यवहार अत्यंत विनम्र, प्रेमपूर्ण और सेवा भाव से परिपूर्ण था।
शीतल “जल राम”, गरम “चाय राम” और स्वादिष्ट “बिस्कुट राम” की व्यवस्था ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। हर व्यवस्था में अनुशासन और सच्चे सेवाभाव की झलक साफ नजर आई।
प्रवचनों की अमृतवर्षा:
LED स्क्रीन के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज के वचनों की अमृतवर्षा हुई, जिसमें उन्होंने पवित्र शास्त्रों का प्रमाण देते हुए सच्चे मोक्ष मार्ग की विवेचना की।
एक दिव्य वाक्य जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया:
“मनुष्य जन्म दुर्लभ है, यह बार-बार नहीं मिलता, जैसे वृक्ष से टूटा पत्ता फिर नहीं जुड़ता।”
इस एक वाक्य ने जीवन की असली अहमियत को स्पष्ट कर दिया।
बिना नशे, बिना भेदभाव — एक पवित्र समाज की झलक
हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं में से एक भी व्यक्ति नशे की अवस्था में नहीं दिखा। यह नज़ारा आज के समाज में दुर्लभ है। सत्संग में भाईचारा, प्रेम, आदर और समानता का अनुपम दृश्य देखने को मिला।
निःशुल्क नाम दीक्षा — आत्मा का पुनर्जागरण:
सत्संग के दौरान श्रद्धालुओं को निःशुल्क नाम दीक्षा भी दी गई, जिससे उन्हें अध्यात्म के वास्तविक मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।
संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित यह सत्संग न केवल एक धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह एक ऐसे समाज की झलक थी जिसकी कल्पना हम केवल शास्त्रों में करते हैं — जहां न भेदभाव है, न नशा, न कुरीतियां; बस है तो सिर्फ प्रेम, भक्ति, सेवा और आत्मज्ञान।
झालावाड़ मनोहरथाना से हेमदास ने बताया विश्व शांति के लिए जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज रात दिन एक करके पूरे विश्व के लिए सत भक्ति का मार्ग दिखा रहे हैं। विश्व कल्याण के लिए पूरे विश्व में 13 सतलोक आश्रमों में एक साल में 6 भंडारे करवा रहे हैं तीन-तीन दिन तक सभी 13 सतलोक आश्रमों में आदरणीय गरीब दास जी महाराज जी की अमृत वाणी का अखंड पाठ, ब्लड डोनेशन, दहेज मुक्त विवाह, देहदान, विशाल सत्संग एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है इसी के साथ हर रविवार पूरे भारत में हर जिले में सत्संग का आयोजन किया जाता है जिससे परमात्मा की पुण्य आत्मा तत्व ज्ञान को सुनकर वह समझ कर संत रामपाल जी महाराज जी से निशुल्क नाम दीक्षा प्राप्त करती है नाम दीक्षा लेने के बाद व्यक्ति समाज में फैल रही सभी कुरीतियों, बुराइयां, नशा, चोरी, रिश्वतखोरी, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा जैसी कुर्तियां से कोसों दूर हो जाते है और सतभक्ति को अपनाकर परमात्मा के मार्ग पर चलते है
