February 11, 2026

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श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग पर भक्ति के रस में डूबा धौलपुर, लगे जयकारे

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धौलपुर।

शहर के पैलेस रोड स्थित राधा बिहारी मंदिर परिसर में इन दिनों भक्ति की अविरल धारा बह रही है। धौलपुर भक्त मंडल समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा व्यास आचार्य योगेश कृष्ण जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर उनके विवाह तक का ऐसा सजीव वर्णन किया कि पाण्डाल में मौजूद हर भक्त भावविभोर हो उठा।
कथा के छठवें दिन का शुभारंभ आचार्य श्री ने उद्धव-गोपी संवाद के प्रसंग से किया। महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम ज्ञानी मित्र उद्धव का अहंकार दूर करने के लिए उन्हें वृंदावन भेजा था। लेकिन जब उद्धव ने गोपियों का भगवान के प्रति निस्वार्थ प्रेम और विरह की पराकाष्ठा देखी, तो वे स्वयं भी भक्ति के रंग में रंग गए। आचार्य ने संदेश दिया कि ईश्वर को पाने के लिए केवल किताबी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए हृदय में गोपियों जैसा अनन्य प्रेम और समर्पण होना आवश्यक है। कथा का मुख्य आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह का प्रसंग रहा। व्यास पीठ से महाराज श्री ने बताया कि किस प्रकार माता रुक्मणी ने भगवान को अपना आराध्य और पति मानकर उन्हें गुप्त पत्र भेजा था। जैसे ही विवाह उत्सव का प्रसंग शुरू हुआ, पूरा वातावरण जयकारों से गुंजायमान हो उठा। भव्य झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु निहाल हो गए। ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और मधुर भजनों की धुन पर भक्त हाथ उठाकर झूमने लगे। इस दौरान पाण्डाल में पुष्प वर्षा की गई और महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाए गए।
​इस अवसर पर आचार्य जी ने गौरी पूजन के आध्यात्मिक रहस्य को समझाते हुए कहा कि माता रुक्मणी ने भगवान को प्राप्त करने के लिए अटूट श्रद्धा के साथ मां गौरी की स्तुति की थी। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म में देवी पूजन का विशेष महत्व है; यह न केवल मनवांछित फल प्रदान करता है बल्कि साधक के भीतर सात्विकता और धैर्य का संचार भी करता है।
इसी के साथ आचार्य जी ने भक्तो से कहा की कल हमारी इस पावन कथा का अंतिम दिन है। आचार्य जी ने विशेष रूप से आह्वान किया है कि कल के दिन अधिक से अधिक संख्या में पधारें।कहते हैं कि कथा का अंतिम दिन ‘पूर्णाहुति’ का होता है। जिस प्रकार पूरे भोजन का सार अंत के मिष्ठान में होता है, वैसे ही पूरी कथा का आध्यात्मिक सार और आशीर्वाद अंतिम दिन प्राप्त होता है। कथा की अवसर पर भक्त मंडल समिति के संगीता गुप्ता, विजय शर्मा, रेखा शर्मा, भोला गुप्ता, नीलम शर्मा, सोनाली, मनोज चौहान, रामकिशोर पाठक, राजेंद्र राणा, सुनील जगरिया, उपेंद्र दीक्षित, किशन यादव एवं भारी तादाद में श्रोतागण एवं साधु संत उपस्थित रहे।

विजय कुमार शर्मा ब्यूरो राजस्थान

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