डॉक्टर मुरलीधर सिंह शास्त्री अधिवक्ता उच्च न्यायालय लखनऊ गीता जयंती के अवसर पर सभी देशवासियों को दी बधाई
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गीता जयंती 1 दिसंबर 2025 के अवसर पर सभी को बधाई
तथा इस जयंती को मोक्षदा एकादशी भी कहते हैं
गीता को केवल सामूहिक पाठ ही ना करें
बल्कि उसमें दिए गए तत्व स्थित प्रज्ञा को प्राप्त करें
श्रीमद् भागवत गीता एवं दुर्गा सप्तशती में 700 श्लोक हैं दोनों धर्म शास्त्रों में समानता है
डॉक्टर मुरलीधर सिंह शास्त्री अधिवक्ता
मा उच्च न्यायालय लखनऊ पीठ एवं पूर्व उपनिदेशक मुख्यमंत्री मीडिया मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्री अयोध्या जी सेवा न्यास
30 नवंबर 2025
आज से लगभग 5184 वर्ष पूर्व मार्गशीर्षमास (अगहन)में भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता का संदेश दिया था तथा गीता के दसवें अध्याय में भगवान ने माघ शीर्षमास को अपना अपना गीता के दसवें अध्याय के 35वें श्लोक में अंश बताया है
गीता जयंती पर यही सबसे अपील है की गीता को पढ़ें और समझे गीता कैसे अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा की स्थितप्रज्ञ क्या है
स्थितप्रज्ञ अर्थात न्यूट्रल होना राग देश से मुक्त होना समाधि की स्थिति को प्राप्त करना
स्थितप्रज्ञ वही है जो दुख में सुख में हlर में जीत में
मान में अपमान में समान रहे
किसी पर क्रोध न करें
तथा किसी से आसक्त न हो
आजकल गीता के उपदेश देने वाले लोग पूर्ण रूप से माया से भरे पड़े हैं
लोगों को गुमराह कर रहे हैं
प्रवचन के नाम पर
उसमें लाखों में शायद ही एक दो कोई हो जो गीता के विचार पर चलता हो गीता का
दूसरा पक्ष कर्म का पक्ष काम करो
करते जो करते जाओ
फल की चिंता मत करो
गीता का तीसरा पक्ष है की पूरी शक्ति का
अपने प्रभु में अपने ईश्वर में लगा दो
आप निश्चित सफल हो जाओगेl
मोक्षदा एकादशी एवं गीता जयंती के अवसर पर विशेष लेख गीता एक युद्ध क्षेत्र में युद्ध के लिए संघर्ष के लिए प्रेरित करने का संदेश है
वही दुर्गा सप्तशती जीवन में हारे हुए लोगों के लिए शक्ति संग्रह करने का ग्रंथ है दोनों में राक्षसों का संघार है संघार करने के कार्य किए गए हैं
श्रीमद् भागवत गीता मुख्य रूप से श्री महाभारत / जय संगीता के भीष्म पर्व पर्व से लिया गया 699 श्लोक का 18 अध्याय में संग्रह है श्रीमद् भागवत गीता एवं
दुर्गा सप्तशती में संबंध है दोनों में 700 श्लोक है तथा एक भगवान श्री कृष्णा श्री अर्जुन को उपदेश दिया है तथा एक भगवान के अवतार मरकडेय /कपिल मुनि ने अपने माता देवहूति को उपदेश दिया है
दोनों में अंतर है
की एक गीता में एक व्यक्ति को नारायण द्वारा युद्ध के लिए प्रेरित करना जबकि
दुर्गा सप्तशती में भगवान एवं देवताओं द्वारा योग माया को आदिशक्ति को शुद्ध के लिए प्रेरित कर राक्षसों का नाश करना
दोनों की पारायण विधि है
दोनों का नवरात्रि में 9 दिन में पाठ किया जाता है तथा गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी श्री रामचरितमानस रामायण के लिए नवरात्रि में पाठ का विधान किया था इसे नावरण पाठ कहा जाता है
जो साधक लोग करते हैं
जय सनातन धर्म
जय हिंद
जय गीता गीता जयंती मोक्षदा एकादशी पर बधाई
