February 11, 2026

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मसकनवां कस्बे के प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर के द्वार पर कूड़े का ढेर, डीएम से शिकायत

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गोंडा।

जिले के छपिया विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत रानीजोत के मसकनवां कस्बे में स्थित सैकड़ों वर्ष पुराने अति प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर के मुख्य द्वार पर कूड़े-करकट का ढेर लगा होने से श्रद्धालुओं में आक्रोश फैल गया है। त्रिस्तरीय पंचायत समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न कौशल द्वारा लगवाई गई कूड़ा उठाने वाली ठेली एक सप्ताह से मंदिर के द्वार पर खड़ी है,जिससे कूड़ा गिरकर सड़ांध पैदा कर रहा है। ग्राम पंचायत सदस्य व्यवसायी बद्री प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को जिलाधिकारी से लिखित शिकायत कर तत्काल सफाई की मांग की है। मसकनवां कस्बा आबादी के लिहाज से छपिया ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। ओडीएफ प्लस श्रेणी में होने के बावजूद स्वच्छता के लिए भारी धनराशि आवंटित होने पर भी यहां की सफाई व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। अध्यक्ष कौशल ने ठेली को मंदिर द्वार पर खड़ा कर रखा है,जबकि कूड़े का निस्तारण कहीं नहीं हो रहा। ठेली से गिरे कूड़े ने मंदिर मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे आने-जाने वाले भक्तों को भारी असुविधा हो रही है। स्थानीय निवासियों ने कई बार अध्यक्ष से ठेली हटाने का अनुरोध किया, लेकिन वे विवाद पर उतारू हो जाते हैं। ग्राम पंचायत सचिव रुचि शुक्ला से भी शिकायत की गई, मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई।बद्री प्रसाद गुप्ता ने शिकायत में कहा कि धनतेरास और दीपावली जैसे स्वच्छता के प्रतीक त्योहारों को ध्यान में रखते हुए कूड़े का ढेर तत्काल हटवाया जाए। मंदिर की पवित्रता और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए। कस्बे के लोग इस गंदगी से परेशान हैं, जो स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर रही है।ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता अभियान का दावा करने वाली व्यवस्था यहां विफल साबित हो रही है। ओडीएफ प्लस का दर्जा पाने वाली पंचायत में ऐसी लापरवाही से स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी उजागर हो रही है। जिलाधिकारी कार्यालय से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उम्मीद है कि शिकायत पर त्वरित कार्रवाई होगी। मंदिर प्रबंधन समिति ने भी सफाई के लिए जिला प्रशासन से अपील की है। यह घटना न केवल मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि कस्बे की छवि को भी धूमिल कर रही है। स्थानीय निवासी उम्मीद कर रहे हैं कि दीपावली से पहले मंदिर द्वार स्वच्छ हो जाएगा, ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के दर्शन कर सकें।

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