यूरिया खाद का खेल और दुर्गा पांडे का ‘शक्तिमान’ अवतार
1 min readयूरिया खाद का खेल और दुर्गा पांडे का ‘शक्तिमान’ अवतार
जिला प्रशासन के बड़े-बड़े अफसरों को नाको चने चबवा दिए! जिला प्रशासन के सुपरहीरो, ए.आर. राघवेंद्र शुक्ला, ने सोचा कि दुर्गा पांडे को सबक सिखाएंगे
भरा सूटकेस ने किसानों के शिकायत पर पानी फेरा
अंबेडकरनगर के कटेहरी ब्लॉक में प्रतापपुर चमुर्खा पी-पैक्स समिति में यूरिया खाद की गड़बड़ी का मामला ऐसा गरमाया कि लगता है, जैसे कोई बॉलीवुड मसाला फिल्म का सीन हो! किसानों ने महीनों तक शिकायतों की झड़ी लगा दी, कृषि अधिकारियों ने चार-चार बार जांच की, और हर बार बोरी की अनियमितता पकड़ी गई। लेकिन कहानी का खलनायक, यानी समिति के सचिव दुर्गा प्रसाद पांडे, इतने ‘शक्तिमान’ निकले कि जिला प्रशासन के बड़े-बड़े अफसरों को नाको चने चबवा दिए! जिला प्रशासन के सुपरहीरो, ए.आर. राघवेंद्र शुक्ला, ने सोचा कि दुर्गा पांडे को सबक सिखाएंगे। लेकिन, अरे भाई, ये क्या? इतनी जोर-आजमाइश के बाद भी बस इतना हुआ कि दुर्गा पांडे को चमुर्खा पी-पैक्स के पद से हटाकर “सजा” दे दी गई। जैसे सरकारी कर्मचारी थे पद से हटा दिए ,सजा है कि प्रमोशन? किसानों का कहना है, “ये तो वही बात हो गई—गोजरे के सौ गोड़, एक टूट गया तो क्या फर्क पड़ गया!” किसानों का गुस्सा: “क्या यही है किसान हित?”किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि जब एक सचिव को हटाने में ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए, तो फिर वो बात क्या सच होगी—किसानों की आय दोगुनी करने की? किसानों ने तो खुलेआम कह डाला, “ये है भाजपा सरकार का किसान हितैषी का ढिंढोरा पीट रही, सरकार के सरकारी नोकर भ्रष्ट कर्मचारियों के ऊपर कार्यवाही में सूटकेस में भरा रुपया बटोर रहे, एक कहावत है अपनों पर रहम, गैरों पर सितम!” दुर्गा पांडे के हौसले इतने बुलंद हैं कि वो न सिर्फ चमुर्खा, बल्कि असाई कला, सिंहपुर, और हैदराबाद की समितियों के भी ‘सुपरमैन’ बने हुए हैं। कालाबाजारी का ‘रात में खेला खेल सुपरमैन बन गया
किसानों का आरोप, दुर्गा पांडे के पास करोड़ की संपत्ति आई कहां से
संपत्ति का रहस्य किसानों का इल्जाम है कि दुर्गा पांडे रात के अंधेरे में खाद की कालाबाजारी का ‘खेल’ खेलते हैं। तीन-तीन समितियों का जिम्मा संभालने वाले ये साहब क्या सचमुच ‘शक्तिमान’ हैं, जो रातों-रात हर जगह पहुंच जाते हैं? या फिर इनके ‘सगे-संबंधी’ समितियों पर बैठकर ‘लाभ’ का खेल खेल रहे हैं? और तो और, चर्चा ये भी है कि अकबरपुर में दुर्गा पांडे ने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली है। अब भाई, एक सचिव की तनख्वाह से परिवार का पेंट भरने में तो लाले बेलना पड़ता है, फिर ये करोड़ों का महल कैसे खड़ा हो गया? किसानों का कहना है, “जांच हो, तो दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा!”प्रशासन का ‘हल्का सजा ड्रामा’जिला प्रशासन ने दुर्गा पांडे को सिर्फ एक समिति से हटाकर अपनी पीठ थपथपाई, लेकिन किसानों का कहना है, “ये तो वही बात है—तरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है!” दुर्गा पांडे अब भी तीन समितियों पर काबिज हैं, और किसानों के मुताबिक, कालाबाजारी का धंधा बदस्तूर जारी है। अब सवाल ये है कि क्या जिला प्रशासन सचमुच इतना लाचार वेबश है, या फिर सूटकेस ‘खेल’ चलता है?किसानों का सवाल: अब क्या?किसानों ने साफ कह दिया है—जब तक दुर्गा पांडे जैसे ‘शक्तिमानों’ की तीन समितियों जांच पूरी नहीं होगी, तब तक न तो यूरिया उर्वरक,बीज नहीं लगे, अब देखना ये है कि क्या जिला प्रशासन इस ‘ मामला के कहानी’ में कोई नया ट्विस्ट लाएगा, या फिर ये फिल्म फ्लॉप होकर खत्म हो जाएगी। तब तक, किसान इंतजार में हैं, और दुर्गा पांडे के हौसले बुलंद! कहावत तो सुन ही ली—अब असली जांच का इंतजार है

