बिजली विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार, प्राइवेट लाइनमैन अन्नू यादव घायल जिंदगी खतरे में
1 min readअंबेडकरनगर
काशीपुर गांव, टांडा: उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक और नया अध्याय सामने आया है, जहां प्राइवेट लाइनमैन अन्नू यादव की जिंदगी अब मौत के कगार पर है। शनिवार की देर शाम काशीपुर गांव में बिजली कनेक्शन जोड़ने के दौरान अचानक सप्लाई शुरू होने से अन्नू यादव गंभीर रूप से झुलस गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब 20 सेकंड तक वह 11,000 वोल्ट के करंट की चपेट में जलता रहा। इस हादसे ने एक बार फिर बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े किए हैं।
हादसे का सच और बिजली विभाग की लापरवाही
अन्नू यादव, जो पिछले 6 वर्षों से बिजली विभाग के लिए प्राइवेट लाइनमैन के रूप में काम कर रहा था, शनिवार को काशीपुर गांव में बकाया बिलों के कारण काटे गए कनेक्शनों को जोड़ने गया था। ग्रामीणों के अनुसार, शाहिद अली, इस्लाम, और नूर मोहम्मद जैसे लोगों के लाखों रुपये के बकाए के बावजूद, बिजली विभाग के दबाव में अन्नू को जबरन कनेक्शन जोड़ने के लिए भेजा गया। शटडाउन लेने के बावजूद, अचानक सप्लाई शुरू होने से यह दर्दनाक हादसा हुआ। अन्नू को पहले जिला अस्पताल, फिर महामाया मेडिकल कॉलेज, और अंत में लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे, फिर भी नहीं सुधरा विभाग
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिजली विभाग की लापरवाही के कारण कई प्राइवेट लाइनमैन हादसों का शिकार हो चुके हैं। राजकुमार नामक लाइनमैन की मौत, विकास कुमार की रीढ़ की हड्डी टूटने, और चंदन कुमार के गंभीर रूप से घायल होने जैसे मामले इस बात के गवाह हैं कि विभाग अपनी गलतियों से सबक नहीं ले रहा। हर बार की तरह, इस बार भी अवर अभियंता (जेई) रामजीत चौधरी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अन्नू उनका कर्मचारी नहीं था और बिना शटडाउन के काम कर रहा था। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि अन्नू पिछले 6 साल से विभाग के लिए काम कर रहा था और बड़े फॉल्ट्स को ठीक करने के लिए उच्च अधिकारियों के निर्देश पर भी जाता था।
भ्रष्टाचार और गैर-जिम्मेदाराना रवैया
बिजली विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। काशीपुर गांव में तीन दिन पहले बकाया वसूली अभियान चलाया गया था, लेकिन बकाया जमा करवाए बिना ही प्राइवेट लाइनमैन को कनेक्शन जोड़ने के लिए मजबूर किया गया। उपखंड अधिकारी (एसडीओ) टांडा ने भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि अन्नू उनका कर्मचारी नहीं था और वह पैसे के लालच में कनेक्शन जोड़ रहा था। वहीं, अधिशासी अभियंता (ईई) मोहित कुमार का फोन हमेशा की तरह “नॉट रीचेबल” रहा। सवाल यह है कि अगर अन्नू अनधिकृत रूप से काम कर रहा था, तो 6 साल तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
ग्रामीणों का आक्रोश और सवाल
हादसे के बाद काशीपुर गांव के लोग आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने एक और युवक की जिंदगी बर्बाद कर दी। ग्रामीणों ने मांग की है कि अन्नू के इलाज का पूरा खर्च विभाग उठाए और उसके परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक प्राइवेट कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जाता रहेगा? बिजली विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार की यह घटना एक बार फिर सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। जब तक शटडाउन प्रक्रिया को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा, प्राइवेट कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाएंगे, और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं कसी जाएगी, तब तक इस तरह के हादसे होते रहेंगे। सरकार और बिजली विभाग को चाहिए कि वह इस मामले की गहन जांच करे और दोषियों को सजा दे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।अन्नू यादव का हादसा बिजली विभाग की लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है। यह समय है कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली सुधारे और प्राइवेट कर्मचारियों की जान की कीमत पर अपनी जिम्मेदारियों से न भागे। आखिर, कब तक निर्दोष लोग इस लापरवाही का शिकार बनते रहेंगे?

