February 11, 2026

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गलत ब्लड रिपोर्ट प्रकरण में सीएमएस ने की कार्यवाही, अस्पताल के कर्मी विकास यादव को अग्रिम आदेशों तक काम करने से रोका

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गलत ब्लड रिपोर्ट प्रकरण में सीएमएस ने कार्यवाही कर निभाई रस्म अदायगी

अस्पताल के कर्मी विकास यादव को अग्रिम आदेशों तक काम करने से रोका

हालांकि सीएमएस ने उसे हटाने का किया है दावा, लेकिन जारी आदेश कुछ और कर रहा बयां

मिल्कीपुर अयोध्या।
सौ सैय्या संयुक्त चिकित्सालय कुमारगंज की पैथोलॉजी से प्रसव पीड़ित महिला की हुई खून जांच में गलत रिपोर्ट देने का मामला अब पूरी तरह से गरमाता जा रहा है। हालांकि अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक रायता फैला देख औपचारिक कार्यवाही कर प्रकरण का पटाक्षेप करने की जगत में जुट गए हैं। उन्होंने अस्पताल के पैथोलॉजी में कंपनी के जारी कम कर रहे एल टी पी ओ सी टी विकास यादव को अग्रिम आदेशों तक अस्पताल के लैब का कार्य करने से रोकने का आदेश जारी कर दिया है।
बताते चलें कि खंडासा थाना क्षेत्र के राय पट्टी गांव निवासी आशीष कुमार सिंह अपनी पत्नी नंदिनी सिंह का इलाज संयुक्त चिकित्सालय कुमारगंज से करवा रहे थे अस्पताल के चिकित्सक ने बीते 1 अगस्त को महिला नंदिनी सिंह के ब्लड की जांच कराई जहां पैथोलॉजिस्ट की ओर से उन्हें उनके ब्लड ग्रुप को भी नेगेटिव बताते हुए रिपोर्ट दे दी गई। केजीएमसी लखनऊ मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने दो यूनिट ब्लड की डिमांड की, इसके बाद ब्लड बैंक की ओर से महिला के ब्लड की जांच की गई जहां रिपोर्ट में महिला का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव निकला के बाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों सहित महिला के तीमारदारों में हड़कंप मच गया। हालांकि महिला का डॉक्टर द्वारा सुरक्षित प्रसव कराया गया जहां जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। मेडिकल कॉलेज लखनऊ से अपने घर वापस लौटने के उपरांत महिला के पति आशीष कुमार सिंह ने बीते सोमवार को संयुक्त चिकित्सालय कुमारगंज के सीएमएस को समूचे घटनाक्रम की लिखित शिकायत करते हुए कार्यवाही की गुहार की थी। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर रवि पांडे ने जांच के लिए टीम गठित कर दी थी। उन्होंने बताया कि पीसीओटी कंपनी और शासन के करार के द्वारा विकास यादव है। जांच कमेटी को उसने बताया कि मानवीय भूल बस गलत ब्लड ग्रुप लिख गया था। उन्होंने बताया कि जांच समिति के संस्तुति के आधार पर कार्यवाही करते हुए उक्त कर्मी को हटा दिया गया है। जिसकी सूचना कंपनी व शासन को दे दी गई है। वहीं दूसरी ओर पीड़ित महिला के पति आशीष सिंह का कहना है कि सीएमएस ने कार्यवाही के नाम पर केवल रस्म अदायगी की है। उनका कहना है कि सीएमएस द्वारा जारी आदेश में कहीं भी दोषी को सेवा से हटाए जाने का जिक्र नहीं किया गया है। सीएमएस ने केवल मामला दबाने का प्रयास करते हुए गोल-गोल आदेश जारी कर दिया है जो पूरी तरह से भ्रामक एवं निराधार है।

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