February 12, 2026

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पद और शिक्षा की गरिमा नेताओं के सामने हुई धूमिल, नारी सशक्तिकरण मिशन पर उठ रहे गंभीर सवाल

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जिले की कलेक्टर व महिला आईएएस अधिकारी के साथ हुआ दुर्व्यवहार,लोगों में आक्रोश

पद और शिक्षा की गरिमा नेताओं के सामने हुई धूमिल, नारी सशक्तिकरण मिशन पर उठ रहे गंभीर सवाल

इस घटनाक्रम को लेकर आमजन और कई बुद्धिजीवी वर्गों ने जताई नाराजगी, बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदात्मक

गोंडा।

जनपद गोंडा में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान जिले की शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी जिलाधिकारी महिला आईएएस को बैठने तक के लिए उपयुक्त स्थान न मिल पाना,अब एक गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण मुद्दा बन गया है। यह दृश्य न केवल अफसोसजनक है बल्कि शासन-प्रशासन के संतुलन और महिलाओं के सम्मान पर भी सवाल खड़ा करता है। बताया जा रहा है कि यह घटना उस समय की है,जब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जनपद दौरे पर थे और जिले में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के लिए प्रमुख स्थान सुनिश्चित किया गया था, लेकिन जनपद की मुखिया के रूप में उपस्थित महिला आईएएस अधिकारी को उचित सम्मान और बैठने का स्थान नहीं दिया गया। इस घटनाक्रम को लेकर आमजन और कई बुद्धिजीवी वर्गों ने नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा—

“हम इस पोस्ट का समर्थन करते हैं और ऐसे कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।”

लोगों ने यह भी कहा कि—

“जब एक जिले की सबसे वरिष्ठ और शिक्षित महिला अधिकारी को मंच या बैठक में उचित स्थान नहीं दिया जाता, तो यह इस बात का संकेत है कि नेताओं के सामने शिक्षा और पद की गरिमा अब कोई मायने नहीं रखती। इसीलिए आज युवा जनसेवा की जगह राजनीति को प्राथमिकता देने लगे हैं।”

इस पूरे मामले ने शासन-प्रशासन की कार्यशैली और महिला अधिकारियों के सम्मान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई लोगों ने इसे प्रोटोकॉल और शिष्टाचार की सीधी अनदेखी बताया है। गौरतलब है कि एक महिला आईएएस अधिकारी,जो पूरे जिले की मुखिया हैं,उन्हें किसी सार्वजनिक सरकारी कार्यक्रम में सम्मानजनक स्थान तक न मिलना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि शासन व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि सत्ता में बैठे नेताओं के सामने अब पद और शिक्षा की गरिमा शून्य हो चुकी है। शायद इसीलिए आज के युवाओं को अफसर बनने से ज्यादा नेता बनने की चाहत है। ऐसे में बुद्दिजीवी वर्ग व पढ़े लिखे शिक्षित लोग इस बेहद दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक मामले की निंदा करते हुए योगी सरकार के नारी सशक्तिकरण मिशन पर भी तरह तरह के गंभीर सवाल खड़े करते हुए कह रहे हैं कि क्या यही है ‘नारी सम्मान’? जब जनपद सूबे के जनप्रतिनिधियों के बीच सार्वजनिक कार्यक्रम में की प्रशासनिक मुखिया को उचित सम्मान नही मिल रहा है तो सामान्य पीड़ित महिलाओं के मान सम्मान व सुरक्षा का कितना ख्याल रखा जाता होगा इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इस शर्मनाक घटना से सरकार के महिला सुरक्षा,सशक्तिकरण अभियान की भी धरातल पर पोल खुल रही है। अब देखना यह होगा कि क्या इस मामले में सरकार और संबंधित अधिकारी कोई प्रतिक्रिया देते हैं या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा। यह घटना महिलाओं के सम्मान, अफसरशाही की गरिमा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के संतुलन पर एक गहन प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

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