February 12, 2026

Awadh Speed News

Just another wordpress site

11 जुलाई से प्रारंभ होगा सावन :- दिनेशाचार्य जी महराज

1 min read
Spread the love

अयोध्या
सनातन धर्म में श्रावण मास का विशेष महत्व है, विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए। क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पांचवां महीना श्रावण मास है। इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई अगस्त माह में आता है। श्रावण मास का आगमन वर्षा ऋतु के समय में होता है। यह वह समय होता है जब धरती पर चारों ओर हरियाली ही हरियाली होती है।
श्रावण मास आत्मशुद्धि, संयम और साधना का समय माना जाता है। इस माह में सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य, सत्य और अहिंसा का पालन करने की प्रेरणा दी जाती है। व्रत, ध्यान, जप और स्वाध्याय के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर की नकारात्मकता को दूर कर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होता है।
सावन का पूरा महीना ही भगवान भोलेनाथ के भक्तों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता। सावन के महीने में प्रतिदिन भोले शंकर भगवान को जल,बेलपत्रादि से आराधन करने से उनकी विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है।जो प्रतिदिन पूजन अर्चन न कर सकें उन्हें सोमवार के दिन अवश्य ही पूजन अर्चन व्रत करना चाहिए। सावन के महीने में आने वाले प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, साथ ही सोमवार का व्रत रखा जाता है।हनुमानगढ़ी, रामपुरभगन के महंत ज्योतिषाचार्य दिनेशाचार्य महाराज ने बताया कि सोमवार को शिवलिंग की आराधना करने से चंद्र जनित दोष जैसे मानसिक अशांति, मां के सुख और स्वास्थ्य में कमी, मित्रों से खराब संबंध, मकान वाहन के सुख में विलंब, हृदय रोग ,नेत्र विकार ,चर्म, कुष्ठ रोग, नजला, जुकाम, श्वास रोग कफ, तथा निमोनिया संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है, तथा समाज में मान प्रतिष्ठा बढ़ती है। पूरे महीने शिवपुराण, भागवत,रामायणदि ग्रंथों का पारायण, स्वाध्याय करने से आध्यात्मिक ऊर्जा का संग्रह होता है।
ऐसा भी माना जाता है कि विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय व अविवाहित महिलाएं अच्छे वर की कामना के लिए इस व्रत को रखती हैं। वहीं सावन में भगवान शिव के पूजन व व्रत से दीर्घायु का वरदान भी प्राप्त होता है। इस महीने में शिवार्चन करने के लिए शिववास देखने की भी आवश्यकता नहीं होती।देश भर में विशेषकर उत्तर भारत में कांवरिया गंगा स्नान कर कांवर में लटकते पात्र में गंगा जल भरकर बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। कांवरियों के “बोल बम” उद्घोष से वातावरण शिवमय हो जाता है। देश दुनिया के तमाम ज्योतिर्लिंग और शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहता है। श्रावण मास में चातुर्मास्य व्रती को शाक का सेवन नहीं करना चाहिए। श्रावण मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक साधना, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। यह महीना हमें भगवान शिव की भक्ति के माध्यम से जीवन में संतुलन, शांति और मोक्ष की ओर प्रेरित करता है।
श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को नवविवाहिता स्त्रियों के द्वारा मंगलागौरी का व्रत भी किया जाता है। यह व्रत विवाह के बाद प्रत्येक स्त्री को 5 वर्षों तक करना चाहिए।विवाह के बाद प्रथम श्रवण में पीहर में तथा अन्य चार वर्षो में पति के गृह में। इस व्रत को करने से स्वयं तथा उससे उत्पन्न कन्याको वैधव्य नहीं प्राप्त होता। इस व्रत में देवी पूजन के साथ-साथ हनुमत दर्शन भी महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की लंबी उम्र, संतान सुख, परिवार में खुशहाली और कुंडली में मांगलिक दोष का प्रभाव कम होता है। इसके साथ ही वैवाहिक से जुड़ी मुश्किलें दूर होती हैं।
सावन – 11 जुलाई से 9अगस्त2025तक
इस बार सावन में 4 सोमवार – क्रमश: 14, 21,28 जुलाई, व 4 अगस्त को होंगे। सावन महीने में पड़ने वाले सोमवार ही “श्रावण सोमवार” कहे जाते हैं। उनकी संख्या कुछ भी हो सकती है। 5,7,सोमवार पूरा करने की कोई आवश्यकता नहीं रहती।
भगवान भोलेनाथ को क्यों प्रिय है श्रावण मास?
सावन मास में किए जाने वाले सोमवार के व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस संदर्भ में कई कथाएं हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन मास में निराहार रहकर कठोर व्रत किया। इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया।
वहीं दूसरी कथा के अनुसार ऐसा भी माना जाता है कि इसी माह में भगवान शिव पृथ्वी पर अवतरित होकर अपनी ससुराल गए थे और वहां उनका स्वागत जलाभिषेक आदि से किया गया था। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव हर वर्ष सावन मास में अपनी ससुराल आते हैं और पृथ्वी वासियों के लिए कृपा प्राप्त करने का यह सबसे उत्तम समय होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *