February 20, 2026

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बरियारी मोरंग खदान के गुंडों का आतंक जारी, किसान ने परिवार सहित डीएम से लगाई न्याय की गुहार

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बांदा
बरियारी बालू खदान के गुंडों का आतंक जारी, किसान ने परिवार सहित डीएम से लगाई न्याय की गुहार

माफियाओं से साठ गांठ रखने वाले एडीएम के होते हुए क्या किसान को मिलेगा न्याय

बरियारी बालू खदान के संचालकों और गुंडों ने खोद डाला किसान का खेत

विरोध करने पर किसान को मिली जान से मारने की धमकी

बांदा

जनपद के बरियारी बालू खदान एक बार फिर सुर्खियों में है जहां बालू खदान के दबंग गुंडों ने एक किसान का खेत ही खोद डाला जब किसान ने विरोध किया और मालिक से बात की तो उसे गाली और जान से मारने की धमकी मिली। साथ ही किसान ने दबंग माफियाओं द्वारा नदी में किए जा रहे अवैध खनन की तस्वीर भी भेजी है जिसमें धड़ल्ले से नदी की जलधारा में खनन कर रहा है। यह कोई पहली घटना नहीं है यह खदान जब से चालू की गई तब से इस खदान के गुंडो द्वारा कई बार घटनाओं को अंजाम दिया। मारपीट, लूट, अपहरण, गैंगरेप और हत्या तक के आरोप इस खदान के गुंडो पर लगे है अवैध खनन तो उनके लिए आम बात है लेकिन पैसों की गर्मी ऐसी की अधिकारी और कर्मचारी सब उनकी जेब में रहते हैं। क्या लेखपाल क्या तहसीलदार क्या एसडीएम क्या एडीएम क्या थानेदार सब इस बालू माफिया की तरफदारी करते नजर आते हैं और उनकी माला जपते रहते हैं। खनिज अधिकारी की बात करें तो उनकी कार्यशैली देखकर लगता है कि वह माफियाओं के हाथों केन नदी को लुटवाकर ही मानेंगे। जहां के एडीएम बालू माफियाओं के सामने पत्रकारों को चिरकुट रहते हो वहां के हालात क्या होंगे यह आप समझ ही सकते हैं।
पूरा मामला नरैनी तहसील के गिरवा थाना अंतर्गत बरियारी बालू खदान का है जहां के रहने वाले किसान रमेश कुमार पुत्र शिव बालक जिलाधिकारी से शिकायत करने आए और बताया कि खदान वालों ने उनका खेत जबरन खोद डाला है जब उसने खंड के मालिक संजीव गुप्ता से बात की तो उसने पीड़ित के साथ गाली गलौज शुरू कर दी और जान से मारने की धमकी दे डाली इसके बाद पीड़ित ने थाना दिवस में शिकायती पत्र दिया था लेकिन कोई सुनवाई और कोई कार्रवाई नहीं हुई इसके बाद थक हार कर किसान जिला अधिकारी के दर पर आया है अब सवाल यह उठता है की खनन की जिम्मेदारी बांदा के एडीएम के पास है और यह वही एडीएम है जिनके ऊपर बालू माफियाओं के साथ सांठ गांठ करने के आरोप लग चुके हैं तो क्या किसान को न्याय मिलेगा और क्या केन नदी की लुट रही अस्मत बच पाएगी यह अब देखने वाली बात होगी।

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