आयुष्मान मित्रों की समस्याओं पर जिला अधिकारी को ज्ञापन, शोषण का लगाया आरोप
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बांदा
जनपद के समस्त आयुष्मान मित्रों ने अपनी समस्याओं को लेकर जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सेवा प्रदाता संस्था द्वारा उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है। ज्ञापन में प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया गया और त्वरित समाधान की मांग की गई।मुख्य समस्याएं ड्यूटी समय और उपस्थिति विवाद आयुष्मान मित्रों की उपस्थिति ऑनलाइन एप के माध्यम से दर्ज की जाती है, जिसमें पंच-इन और पंच-आउट का समय सुबह 9:30 से शाम 6:30 तक तय किया गया है।
यदि निर्धारित समय से 1 मिनट पहले भी पंच-आउट किया जाता है, तो आधे दिन की उपस्थिति मानी जाती है, जिससे मानदेय में कटौती हो रही है।
सरकारी कार्यालय के अनुसार, ड्यूटी का समय सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक होना चाहिए।
मरीज भर्ती का लक्ष्य एजेंसी द्वारा आयुष्मान मरीज भर्ती का मासिक लक्ष्य दिया जाता है।लक्ष्य पूरा न होने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है, जिससे सभी आयुष्मान मित्र मानसिक दबाव में हैं। स्थानीय अधीक्षक से सत्यापन की मांग
पहले अधीक्षक द्वारा उपस्थिति सत्यापित की जाती थी। आयुष्मान मित्रों ने इस प्रक्रिया को पुनः लागू करने की मांग की।
स्थानांतरण और चेतावनी
तीन आयुष्मान मित्रों को कार्यमुक्त कर दिया गया है, और अन्य को चेतावनी दी गई है कि यदि 100 मरीजों का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ, तो सभी को हटा दिया जाएगा।
अन्य समस्याएं और मांगें
बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा की टीएमएस रैंकिंग तीसरे स्थान पर है, जो प्रगति को दर्शाता है।
अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाओं के बाद भी आयुष्मान मित्रों को काम पर मजबूर किया जा रहा है।
ज्ञापन की प्रतिलिपियां संबंधित अधिकारियों को भेजी गईं
ज्ञापन की प्रतियां प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सीएमओ बांदा, डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर कानपुर, जिला श्रम विभाग सहित अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी गई हैं।
मांग आयुष्मान मित्रों ने जिला अधिकारी से अनुरोध किया कि उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि वे तनावमुक्त होकर अपनी सेवाएं दे सकें।

