March 28, 2026

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श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास जी द्वारा अपनी मधुर वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा

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श्री सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर उरई में नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास जी द्वारा अपनी मधुर वाणी से भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा को विस्तार से श्रवण कराकर भक्ति गणों को किया गया मंत्रमुग्ध
उरई जालौन

सिद्धपीठ ठड़ेश्वरी मन्दिर उरई जनपद जालौन के महन्त श्री श्री 1008 श्री सिद्ध रामदास महामण्डलेश्वर के सानिध्य में कई वर्षों से चल रही अखण्ड रामायण व नववर्ष के आगमन पर श्रीमद् भागवत कथा एवं 1 जनवरी को विशाल भण्डारा का आयोजन किया जा रहा है।
महन्त जी ने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा में आज तीसरे व चौथे दिन 27-28 दिसम्बर से श्रीराम-जानकी आश्रम गौरियापुर- अकबरपुर कानपुर देहात के पधारे कथा बाचक भागवत व्यास अनन्त श्री विभूषित वैष्णव पीठाधीश्वर महन्त श्री देवनारायण दास जी महाराज (वेदान्ताचार्य) के कृपा पात्र शिष्य परम संत श्री राघवदास जी महाराज (वैष्णव) के मुखारविंद से दो दिवसीय अलग अलग पावन कथा में भक्ति ध्रुव व भक्ति प्रहलाद की कथाओं का विस्तार से अपनी मधुर वाणी से प्रस्तुतीकरण कर भक्त गणों को भावा विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भक्ति ध्रुव ने जन्म से ही नारायण भगवान के उपासक थे भक्ति ध्रुव के पिता जी राजा उत्थान पात थे।उनके दो पत्नियां थीं पहली पत्नी सुनीती से भक्ति ध्रुव ने जन्म लिया था तथा दूसरी पत्नी सुरूती से उत्त्तम ने जन्म लिया था।जब ध्रुव अपने पिता राजा उत्थान पात की गोद में बैठे थे तभी दूसरी पत्नी सुरूती ने ध्रुव को पिता राजा उत्थान पात की गोद में बैठा देख आग बबूला हो गई।और अपने पिता राजा उत्थान पात की गोद हाथ पकड़ कर झटका देकर उठा दिया। जिससे दु:खी होकर भक्ति ध्रुव मां की आज्ञा से जंगल में तपस्या करने चले गए। वहीं दूसरी ओर भक्ति प्रहलाद की कथा को विस्तार से सुनाते हुए कहा कि भक्तिउ प्रहलाद के पिता हिरण्या कश्यप ने कहा कि तुम्हारे भगवान कहां- कहां रहते हैं।तो भक्ति प्रहलाद ने कहा कि मेरे भगवान सभी जगह विराजमान हैं। भक्ति प्रहलाद भी श्रीनारायण भगवान केउ जन्म से ही उपासक थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित करने लगे। मउन्होंने अपनी बहिन भक्ति प्रहलाद की बुआ होलिका को भक्ति प्रहलाद को मारने के लगाया। जिसने प्रहलाद को खिलाने के बहाने होलिका दहन के दौरान उसमें भक्ति प्रहलाद को साथ लेकर कूद गई। जिसमें होलिका का दहन हो गया। लेकिन भक्ति प्रहलाद भगवान का नाम लेते हुए सुरक्षित बच गए। इसके बाद भगवान नारायण न नरसिंह का रूप धारण कर राक्षस हिरण्यकश्यप का बध किया। आज चौथे दिन कथा व्यास जी ने बासदेव देवकी के कथा सुनाते हुए कहा कि कंस के अत्याचार से सभीउ प्रजा दु:खी रहती थी।जब राजा कंस की बहिन देवकी की शादी राजा बासदेव से हो रही थी।वह बहिन को उसके ससुराल रथ में बिठा कर भेजने जा रहा था तभी आकाशवाणी हुई कि जिस बहिन को तुम बड़े प्यार के साथ उसकी ससुराल भेजने जा रहे हो।उसी बहिन के आठवें पुत्र से तुम्हारा बध होगा। जिससे राजा कंस ने बहिन देवकी व बहनोई को जेल में डलवा दिया। भादौं मास की अष्टमी की रात्रि रोहिणी नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। उनके जन्म लेते ही जेल के फाटक के ताले खुल गये। बासुदेव जी भगवान श्रीकृष्ण को निर्देश बाबा के घर वृन्दावन में छोड़ आए थे।नंद बाबा के घर जन्मी कन्या को अपने घर बासुदेव जी उठा लाए। जेल के अंदर पहुंचते ही सभी द्वारपाल जाग गये। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर राजाओं कंस को सूचना दी तो राजा कंस तुरन्त जेल पहुंच कर देवकी की आठवीं संतान पुत्री को उठा लिया। जैसे ही राजा कंस ने उसे जमीन पर पटक कर मारना चाहा।तो वह हाथ से छूट गई। तभी उसने आकाशवाणी की।कि तुम्हारे मारने वाला जन्म ले चुका है। इसी के साथ सूर्यवंशी राजा की भी कथा का विस्तार से कथा को विस्तार से अपनी मधुर वाणी से सुनाकर भक्ति गणों को भावा विभोर कर दिया।
श्रीमद् भागवत कथा पुराण के पारीक्षित का.ज्ञानसिंह सेवानिवृत्त लेखपाल (दमा वाले) व धर्मपत्नी श्रीमती मीरा देवी के अलावा ठा.मुकुट सिंह,ठा.तुलाराम सिंह सेवानिवृत्त स्वास्थ्य विभाग एवं समस्त दमा परिवार एवं सैकड़ों भक्त गणों ने पधार कर श्रीमद् भागवत कथा पुराण का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य बनाया।
श्रीमद् भागवत कथा पुराण में परमसंत जी के मुखारविंद सेऊ कल 29 दिसम्बर को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा का विस्तार से वर्णन किया जायेगा।

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