फरियाद या चेतावनी! ‘खतरों के खिलाड़ी’ बनने को मजबूर अटेसर के ग्रामीण, विधायक जी क्या अब नहीं चाहिए वोट
1 min readअयोध्या
एक तरफ जहां सरकार की ओर से हर गांव और शहर को सुगम सड़कों से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अयोध्या जनपद की मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अटेसर से एक बदहाली भरी तस्वीर सामने आ रही है। यहां के ग्रामीण बदहाल और जर्जर सड़कों के कारण रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का गुस्सा और लाचारी अब सड़कों पर साफ दिखाई दे रही है। लंबे समय से जनप्रतिनिधियों से लगाई जा रही गुहार के बाद भी जब हालात में कोई सुधार नहीं हुआ, तो अटेसर के ग्रामीणों ने सीधा सवाल दागते हुए कहा है— “विधायक जी! कभी हमारे मन की बात भी सुन लीजिए। आखिर कब तक हम खतरों से भरी सड़कों पर चलने के लिए मजबूर रहेंगे? क्या आपको हमारी कोई जरूरत नहीं है, या फिर अब आपको गांव से वोटों की जरूरत नहीं रही?” अटेसर ग्राम पंचायत की मुख्य सड़क की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि यह पहचान पाना मुश्किल है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क। बरसात के दिनों में जलभराव के कारण सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं, जिससे आए दिन दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। स्कूल जाने वाले नौनिहालों और इलाज के लिए अस्पताल जाने वाले मरीजों के लिए यह रास्ता किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। एम्बुलेंस या आपातकालीन वाहनों का गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय वोट मांगने के लिए बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत हासिल होने के बाद जिम्मेदार नेता गांव का रुख तक नहीं करते। लगातार उपेक्षा झेल रहे ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। गांव के लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण और मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वे आने वाले समय में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का कड़ा विरोध करेंगे। “क्या अटेसर ग्राम पंचायत के लोगों को केवल वोट बैंक समझा जाता है? अगर हमारी बुनियादी सुविधाओं की सुध नहीं ली जाएगी, तो आने वाले चुनाव में जनता अपना फैसला खुद सुनाएगी।” — अटेसर के आक्रोशित ग्रामीण अब देखने वाली बात यह होगी कि इस प्रमुख जनसमस्या और ग्रामीणों की तीखी फरियाद के बाद स्थानीय विधायक और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी क्या कदम उठाते हैं। क्या अटेसर के ग्रामीणों को बदहाल सड़क से मुक्ति मिलेगी या उन्हें यूँ ही अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ेगी?

