करंट की चपेट में आए लाइनमैन,दर्द की घड़ी में 50 हजार की मदद, इंसानियत का दिया बड़ा संदेश
1 min readकरंट की चपेट में आए लाइनमैन जफर अब्बास के परिवार के साथ खड़ी हुई शियाने हैदरे कर्रार वेलफेयर एसोसिएशन, प्रदेश अध्यक्ष अलमदार हुसैन ने पहुंचकर बढ़ाया मदद का हाथ
बधुआंकलां/ सुलतानपुर।
मुसीबत के वक्त रिश्तों और दावों की असली परीक्षा होती है। जब किसी परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूटता है, तब संवेदना के शब्दों से आगे बढ़कर मदद का हाथ थामना ही इंसानियत की असली पहचान बनता है। करंट की चपेट में आकर असमय जान गंवाने वाले लाइनमैन जफर अब्बास के परिवार के लिए ऐसी ही संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल शियाने हैदरे कर्रार वेलफेयर एसोसिएशन ने पेश की है।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अलमदार हुसैन पदाधिकारियों के साथ मनियारपुर स्थित दिवंगत जफर अब्बास के आवास पहुंचे। शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर उन्होंने परिजनों का दर्द साझा किया और उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान संस्था की ओर से परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
यह सहायता केवल एक आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उस परिवार को यह भरोसा दिलाने की कोशिश भी है कि मुश्किल की इस घड़ी में समाज उसे अकेला नहीं छोड़ रहा।
अलमदार हुसैन ने कहा कि जफर अब्बास की असमय मौत से परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। ऐसे समय में संवेदना व्यक्त करना जरूरी है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि सक्षम लोग और सामाजिक संगठन आगे बढ़कर पीड़ित परिवार का हाथ थामें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एसोसिएशन भविष्य में भी परिवार की जरूरत के मुताबिक हरसंभव सहयोग के लिए तत्पर रहेगी।
सिर्फ सहायता नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
आज जब सामाजिक सरोकार अक्सर औपचारिक संवेदनाओं और सोशल मीडिया संदेशों तक सीमित रह जाते हैं, ऐसे में किसी जरूरतमंद परिवार तक स्वयं पहुंचकर आर्थिक सहयोग करना समाज के सामने एक अलग संदेश रखता है। शियाने हैदरे कर्रार वेलफेयर एसोसिएशन की इस पहल ने यह सवाल भी सामने रखा है कि अगर समाज के सक्षम लोग अपने आसपास संकट में घिरे परिवारों की जिम्मेदारी का कुछ हिस्सा भी उठा लें, तो कितने परिवारों का दर्द कम हो सकता है? संस्था के पदाधिकारियों ने दिवंगत जफर अब्बास की मगफिरत के लिए दुआ की और परिवार को सब्र-ए-जमील अता होने की प्रार्थना की।
स्थानीय लोगों ने एसोसिएशन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि जरूरत के समय पीड़ित परिवार तक पहुंचना ही वास्तविक समाजसेवा है। लोगों का कहना है कि ऐसी पहलें सिर्फ एक परिवार की मदद नहीं करतीं, बल्कि पूरे समाज में आपसी सहयोग, संवेदना और इंसानियत की भावना को मजबूत करती हैं।
इस अवसर पर संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. मोहतशम, मंडल अध्यक्ष दिलशाद हुसैन, मौलाना आज़म मेहदी, खादिम अब्बास, युवा प्रदेश अध्यक्ष फज़ल रिज़वी समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
जफर अब्बास की मौत का दर्द परिवार कभी भूल नहीं सकता, लेकिन संकट की इस घड़ी में 50 हजार रुपये की मदद के साथ संस्था का उनके घर तक पहुंचना यह संदेश जरूर छोड़ गया कि इंसानियत अभी जिंदा है—और समाजसेवा का असर तब सबसे ज्यादा दिखाई देता है, जब मदद दिखावे के लिए नहीं, जरूरतमंद के साथ खड़े होने के लिए की जाए।

