मुकदमा छिपाकर बनवाया चरित्र प्रमाण पत्र, डीएम ने किया निरस्त
1 min readमिथ्यापूर्ण शपथ पत्र देकर हासिल किया था प्रमाण पत्र, जांच में खुली पोल
गोण्डा। आपराधिक मुकदमे की जानकारी छिपाकर चरित्र प्रमाण पत्र हासिल करना पवन कुमार को भारी पड़ गया। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए पवन कुमार पुत्र शिव प्रसाद, निवासी ग्राम गढ़ी, थाना मोतीगंज के पक्ष में पूर्व में जारी चरित्र प्रमाण पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
मामला ठेकेदारी कार्य के लिए चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने से जुड़ा है। पवन कुमार ने प्रमाण पत्र के लिए आवेदन के साथ शपथ पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें उनके विरुद्ध कहीं भी कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज न होने की घोषणा की गई थी। पुलिस अधीक्षक की संस्तुति के आधार पर उनके पक्ष में चरित्र प्रमाण पत्र संख्या 209/2025, दिनांक 3 जुलाई 2025 को जारी किया गया था। बाद में गोण्डा निवासी अमित कुमार पुत्र बृजेश कुमार ने जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि पवन कुमार ने अपने विरुद्ध दर्ज और लंबित आपराधिक मुकदमे की जानकारी छिपाकर चरित्र प्रमाण पत्र प्राप्त किया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मामले की जांच अपर जिलाधिकारी से कराई।
जांच में सामने आया कि पवन कुमार उर्फ पलालू के विरुद्ध मु0अ0सं0 102/2021 में धारा 51 आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 तथा धारा 506, 504, 188 और 147 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज है। मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय से सम्मन भी जारी हो चुका है।
सबसे अहम बात यह सामने आई कि 4 जून 2025 को चरित्र प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किए जाने से पहले ही उक्त मुकदमा दर्ज था, बावजूद इसके आवेदक ने अपने शपथ पत्र में आपराधिक मुकदमे का कोई उल्लेख नहीं किया।
जांच आख्या और उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद जिलाधिकारी ने माना कि आवेदक ने अपने विरुद्ध दर्ज मुकदमे की जानकारी छिपाकर असत्य एवं मिथ्यापूर्ण शपथ पत्र प्रस्तुत किया था। इसके आधार पर जिलाधिकारी ने चरित्र प्रमाण पत्र संख्या 209/2025 को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
जिलाधिकारी की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकारी प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए तथ्यों को छिपाने या गलत शपथ पत्र देने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है।

