एसडीएम न्यायालय में अवैध वसूली का खेल,प्राइवेट कर्मचारी मांग रहा फाइल दिखाने के लिए घूस
1 min readकरनैलगंज एसडीएम न्यायालय में अवैध वसूली का खेल: प्राइवेट कर्मचारी मांग रहा फाइल दिखाने के 1000, अधिवक्ता ने आयुक्त-डीएम को भेजी शिकायत
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ 21 सेकंड का वीडियो, आरोपी का पहले भी अवैध वसूली में आ चुका है नाम
गोंडा।

करनैलगंज तहसील के एसडीएम न्यायालय में भ्रष्टाचार का एक और गंभीर मामला सामने आया है। अधिवक्ता पंकज कुमार दीक्षित ने आरोप लगाया है कि एसडीएम द्वारा वसूली और फाइलों में आदेश कराने के लिए नंद कुमार दुबे नामक प्राइवेट कर्मचारी को रखा गया है, जो फाइल दिखाने के एवज में 1000 रुपये की मांग कर रहा है। उन्होने इस संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट व 21 सेकंड का वीडियो भी वायरल किया है। आरोप है कि संपर्क करने पर एसडीएम ने फोन नहीं उठाया और व्हाट्सएप पर भी कोई जवाब नहीं दिया।
अधिवक्ता ने आयुक्त और डीएम को भेजी लिखित शिकायत
अधिवक्ता पंकज दीक्षित ने सोमवार 10 अगस्त 2026 को शाम 4:30 बजे आयुक्त देवीपाटन मंडल और जिलाधिकारी गोंडा को ईमेल के माध्यम से लिखित शिकायत भेजी है। शिकायत में उन्होंने लिखा है कि ग्राम पंडरी सविता जनपद गोंडा के वह निवासी हैं, जो समय-समय पर तहसील कर्नलगंज में भी मुकदमें की पैरवी के लिए जाते रहतें हैं। उन्होने देखा व महसूस किया है कि एसडीएम कर्नलगंज ने वसूली के लिए और फाइलों में आदेश के लिए प्राइवेट कर्मचारी नंद कुमार दुबे को रख रखा है, जो फाइल दिखाने के लिए 1000 रुपये माँग रहा है, तथा कहता है कि साहब हमको रखे हैं जैसा साहब कहेंगे वैसा करेंगे। एसडीएम साहब को फोन लगाने पर फोन नहीं उठाते हैं और व्हाट्सएप पर भी संज्ञान नहीं लेते हैं इसलिए प्रकरण की जाँच और सख्त कार्रवाई हेतु आपको अवगत कराना पड़ रहा है।
“जीरो टॉलरेंस नीति पर उठे सवाल”
अधिवक्ता पंकज दीक्षित ने कहा कि सरकारी कार्यालय में प्राइवेट व्यक्ति द्वारा पैसे लेकर काम कराना सीधे-सीधे भ्रष्टाचार है। इससे आम जनता और वादकारियों का खुला शोषण हो रहा है। उन्होंने आला अधिकारियों से मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा तत्काल फर्जी तरीके से कार्यरत प्राइवेट कर्मचारी नंद कुमार दुबे को हटाते हुए मुकदमा पंजीकृत कराकर कार्यवाही करने की मांग की है। वीडियो वायरल होने के बाद तहसील परिसर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों का कहना है कि अगर फाइल देखने के लिए ही पैसे देने पड़ेंगे तो गरीब आदमी न्याय कैसे पाएगा।
पहले भी आ चुका है नाम, नहीं हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार प्राइवेट व्यक्ति नंदकुमार दुबे का नाम पहले भी एसडीएम न्यायालय में जमानत के बदले खुलेआम अवैध वसूली और तारीख देने के नाम पर पैसे मांगने के मामले में सामने आ चुका है। उस समय भी वीडियो वायरल हुआ था और मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया था, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि कई वर्षों से दुबे इस न्यायालय में अवैध रूप से सरकारी कर्मचारी बनकर खुलेआम कार्य कर रहे हैं। शिकायत करने वालों को काम न करने और जमानत न होने देने की धमकी भी दी जाती है। बावजूद इसके स्थानीय अधिकारी मौन हैं, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं।
अवैध वसूली से त्रस्त वादकारियों की मांग है कि तहसील में अवैध रूप से कार्यरत सभी “प्राइवेट कर्मचारियों को तुरंत हटाया जाए। एसडीएम न्यायालय में सीसीटीवी लगाकर फाइलों के निस्तारण की ऑनलाइन व्यवस्था की जाए।”
फिलहाल इस पूरे मामले में एसडीएम करनैलगंज से उनका पक्ष जानने के लिए सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया, लेकिन फोन नेटवर्क क्षेत्र से बाहर था।
महादेव मौर्या
