झोलाछाप के इंजेक्शन से बिगड़ी 3 साल की बच्ची की हालत, शरीर पर निकले छाले, बहराइच मेडिकल कॉलेज में भर्ती
1 min readझोलाछाप के इंजेक्शन से बिगड़ी 3 साल की बच्ची की हालत, शरीर पर निकले छाले, बहराइच मेडिकल कॉलेज में भर्ती
कर्नलगंज के छतौनी चौराहे का मामला, पिता ने सीएमओ और पुलिस से की शिकायत, अब तक नहीं हुई कार्रवाई
गोण्डा। कर्नलगंज क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही एक मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ गई। यहां एक झोलाछाप के गलत इंजेक्शन के कारण 3 वर्षीय बच्ची की हालत गंभीर हो गई। बच्ची के पूरे शरीर पर छाले निकल आए हैं। उसे बहराइच मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां इलाज चल रहा है।
क्या है पूरा मामला
भुलियापुर निवासी ननकऊ ने बताया कि 14 जुलाई को उनकी बेटी रहिनुमा को तेज बुखार आया था। वह उसे छतौनी चौराहे पर स्थित डॉ. अरविंद कुमार वर्मा नामक झोलाछाप के पास ले गए। डॉक्टर ने दो सिरप और एक इंजेक्शन दिया। आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही बच्ची की तबीयत और बिगड़ गई। उसके शरीर पर बड़े-बड़े छाले और घाव हो गए। पहले परिजन बच्ची को मुस्तफाबाद सीएचसी ले गए। वहां से हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल बहराइच रेफर कर दिया गया।
शिकायत के बाद भी चुप्पी, सीएचसी अधीक्षक पर संरक्षण के आरोप
पीड़ित पिता ने 29 जुलाई को सीएचसी अधीक्षक, सीएमओ गोंडा संतलाल पटेल और कोतवाली कर्नलगंज में लिखित शिकायत दी है। उनका आरोप है कि अब तक आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इस पर जब सीएचसी अधीक्षक अनुज कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “उन्हें अभी कोई शिकायत नहीं मिली है।” जबकि पीड़ित पिता का कहना है कि उन्होंने 29 जुलाई को कार्यालय में शिकायत पत्र दिया था और रिसीविंग भी ली थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का गोरखधंधा सीएचसी प्रशासन की अनदेखी और संरक्षण के कारण ही फल-फूल रहा है। शिकायत मिलने के बाद भी कार्रवाई न होना इसी ओर इशारा करता है।
वहीं भंभुआ चौकी प्रभारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि मामले से स्वास्थ्य विभाग को अवगत करा दिया गया है। विभागीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। खबर लिखे जाने तक आरोपी झोलाछाप डॉक्टर अरविंद कुमार वर्मा का फोन बंद आ रहा था।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन और सीएमओ से मांग की है कि जिले में अवैध रूप से क्लीनिक चला रहे झोलाछापों पर तुरंत कार्रवाई हो, सीएचसी अधीक्षक की भूमिका की जांच हो और बच्ची के इलाज का खर्च सरकार उठाए।

