उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा का ब्राह्मण कार्ड, विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे अखिलेश यादव
1 min readलखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा का ब्राह्मण कार्ड! विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी सपा
जैसे जैसे 2026 अपने ढलान की तरफ बढ़ रहा है वैसे वैसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती भी शुरू हो चुकी है।
प्रदेश के प्रमुख दलों सत्ताधारी दल बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल सपा दोनों अपनी अपनी सियासी रणनीति को धार दे रहे हैं…
लोकसभा चुनाव में मिली सफलता से अखिलेश यादव पूरी तरह से उत्साहित हैं।
दूसरी तरफ राम मंदिर चढ़ावा चोरी, संगम मेला क्षेत्र में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज से हुए विवाद सहित अन्य कारणों से वह इस बार अवसर तलाश कर रहे हैं।
अखिलेश यादव की राजनीति में सनातन धर्म एवं ब्राह्मण पॉलिटिक्स के जरिए वह इस बार जीत का मंसूबा बना चुके हैं।
PDA के नारे जरिए वह अपने कोर वोट बैंक के अतिरिक्त दलितों पिछड़ों को कई कारणों से विगत चुनावों में सपा के साथ नहीं थे उन्हें भी जोड़ने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
प्रमुख विपक्षी दल सपा अपनी इन्हीं नीतियों पर आगे बढ़ते हुए टिकट वितरण चुनावी रणनीति पर कार्य करती नजर आ रही है।
जिसमें इस बार सपा के सिंबल पर बड़ी संख्या में ब्राह्मण उम्मीदवार एवं दलित कैंडीडेट को टिकट देने की रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं।
सपा का कोर वोट बैंक सपा के साथ पहले ही मजबूती से खड़ा नजर आ रहा है।
बीजेपी की तरफ से सीएम योगी आदित्यनाथ भी विभिन्न जनपदों का दौरा कर सरकार की विकास योजनाओं का लोकार्पण शिलान्यास कर 2027 के मिशन को धार दे रहे हैं।
बीजेपी का मुख्य चुनावी एजेंडा हिंदुत्व ही रहेगा.
जबकि विपक्ष 10 वर्षों से सत्ता में रही बीजेपी से महंगाई बेरोजगारी किसानों की समस्याओं पर आक्रामकता का प्रदर्शन करेगा।।
रोमांचक होने वाले इस बार के विधानसभा चुनाव में एंटी इनकंबेसी के मतों और दलितों पिछड़ों के वोटो में सेंधमारी का होगा
क्योंकि दो दलों के बीच सीधे टक्कर वाले इस चुनाव में वोट कटवा पार्टियों के अस्तित्व पर संकट के बादल छाए रहेंगे।
