अयोध्या में आस्था के नाम पर वसूली, श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर उठे गंभीर सवाल
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अयोध्या।

भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने के दावों के बीच श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। सरयू तट पर स्नान के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं, को मूलभूत सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरयू नदी में स्नान के बाद महिलाओं के वस्त्र परिवर्तन के लिए टेंटनुमा चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। आरोप है कि इन चेंजिंग रूम का उपयोग करने के लिए प्रति महिला 10 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था किसी सरकारी एजेंसी की है अथवा निजी संचालकों द्वारा संचालित की जा रही है, लेकिन श्रद्धालुओं में इसे लेकर नाराजगी देखी जा रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि जिस अयोध्या को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने का दावा किया जा रहा है, वहां महिलाओं के लिए पर्याप्त और निःशुल्क चेंजिंग रूम तक उपलब्ध नहीं हैं। आस्था के केंद्र पर आने वाले लोगों से हर कदम पर धन वसूली के आरोप प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं।
वहीं सरयू तट पर धार्मिक अनुष्ठानों के नाम पर बछिया के माध्यम से “वैतरणी पार” कराने जैसी परंपराओं को लेकर भी बहस छिड़ गई है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक भावनाओं का सहारा लेकर लोगों से धन लिया जा रहा है, जबकि पशु कल्याण और धार्मिक मर्यादाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि प्रशासन पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करे कि चेंजिंग रूम संचालन किसके अधीन है, शुल्क किस आधार पर लिया जा रहा है तथा महिलाओं के लिए पर्याप्त निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
प्रज्ञा संवाद विशेष
“रामनगरी में आस्था का सम्मान जरूरी है, लेकिन श्रद्धालुओं की जेब पर बोझ और सुविधाओं की कमी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है।”
