चकबंदी विभाग के खिलाफ किसानों का उग्र प्रदर्शन
1 min readइंदिरा भवन में घमासान लिखित आश्वासन के बाद शाम 4 बजे आंदोलन समाप्त
लखनऊ।

चकबंदी विभाग की मनमानी, भ्रष्टाचार और किसानों के उत्पीड़न के खिलाफ इंदिरा भवन, लखनऊ में किसानों का आंदोलन आज उग्र रूप में देखने को मिला। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी हरनाम सिंह वर्मा के नेतृत्व में प्रदेश भर से पहुंचे सैकड़ों किसानों ने जोरदार धरना प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को घेर लिया।
धरना के दबाव में प्रशासन को तत्काल हरकत में आना पड़ा और चकबंदी आयोग के सभागार में करीब 2 घंटे तक तीखी वार्ता चली। इस वार्ता में मंडल अध्यक्ष आगरा राजकुमार तोमर, मंडल अध्यक्ष प्रयागराज बबलू दुबे सहित विभिन्न जनपदों के जिला अध्यक्ष मौजूद रहे, जिन्होंने किसानों की समस्याओं को मजबूती से रखा।
बैठक के बाद चकबंदी विभाग द्वारा किसानों की शिकायतों को स्वीकार करते हुए लिखित रूप में आश्वासन दिया गया, जिसमें कई जनपदों की समस्याओं पर कार्रवाई का भरोसा दिया गया।
प्रस्तुत लिखित पत्र/आश्वासन में—
हरदोई में चकबंदी धारा 6(1) के प्रकाशन की मांग पर कार्रवाई
प्रयागराज में कब्जा/चकबंदी विवादों की जांच
महोबा में शिकायतों की जांच के लिए समिति गठन
बांदा में लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश
जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल किए गए हैं।
शुरुआत में किसानों ने साफ कर दिया था कि केवल कागजी आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए। आंदोलन के दौरान किसानों ने 4 जून तक धरना जारी रखने और 5 जून को प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान भी किया।
हालांकि, प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद शाम करीब 4:00 बजे किसानों ने आंदोलन को समाप्त करने का निर्णय लिया।
धरना एवं वार्ता में प्रमुख रूप से प्रदीप शुक्ला (जिला हरदोई), जिला अध्यक्ष बाराबंकी, राजेश रावत (जिला अध्यक्ष बांदा) सहित अन्य जिलों के किसान नेता उपस्थित रहे।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि दिए गए आश्वासन पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन पुनः और अधिक उग्र रूप में शुरू किया जाएगा।
