संस्कार और चरित्र से ही संभव है जीवन का कल्याण :— डॉ. अनुराग शास्त्री
1 min readधौलपुर राजस्थान।

उमानगर कॉलोनी में संगीत मय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
धौलपुर
शहर के चोपड़ा मंदिर के पीछे स्थित उमानगर कॉलोनी प्रांगण में आयोजित की जा रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के मुख्य वक्ता, मुरैना वाले सुप्रसिद्ध डॉ. अनुराग शास्त्री महाराज ने भगवान के विभिन्न अवतारों और प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा के दौरान महाराज जी ने कर्दम ऋषि और कपिल महाराज के प्रसंग को विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सांख्य शास्त्र के प्रणेता भगवान कपिल ने अपनी माता देवहूति को ज्ञान का उपदेश देकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया था। डॉ अनुराग शास्त्री महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि
संस्कारों का हो रहा है ह्रास
वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. शास्त्री ने कहा:
”हमारा देश सदैव से संस्कारों की भूमि रहा है। यहाँ सती सावित्री, माता सीता और अहिल्याबाई जैसी महान देवियाँ हुई हैं, जिन्होंने नारी शक्ति और चरित्र की मिसाल पेश की। लेकिन आज के समय में संस्कारों और चरित्र का ह्रास हो रहा है, जो समाज के लिए चिंता का विषय है।”
महाराज जी ने प्रवचन के अंत में भक्तों को संदेश देते हुए कहा कि यदि इंसान अपनी बुद्धि संसार और माया में लगाएगा, तो वह हमेशा दुखों के जाल में फंसा रहेगा। इसके विपरीत, जो अपनी बुद्धि भगवान और संतों के चरणों में लगाता है, उसे ही इस संसार से मोक्ष मिलता है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि मानव जन्म मिला है, तो हमें निरंतर भगवान का भजन और अच्छे कर्म करने चाहिए।
कथा के दौरान भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। डॉ अनुराग शास्त्री महाराज ने कहा कि 1:00 से 5:00 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा प्रवचन होती है और रात्रि को रासलीला होती है।
अंत में आरती के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
ब्यूरो विजय शर्मा
