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अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस २०२५ के अवसर पर डॉ मुरलीधर सिंह शास्त्री अधिवक्ता

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10 दिसंबर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस २०२५
के अवसर पर
डॉ मुरलीधर सिंह शास्त्री
अधिवक्ता
मा उच्च न्यायालय इलाहाबाद एवं लखनऊ
तथा पूर्व उपनिदेशक मुख्यमंत्री मीडिया सेंटर उत्तर प्रदेश
एव मानवशास्त्री (Anthropologist)इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज (1989 बैच)

9 दिसंबर 2025 लखनऊ
मानवाधिकार के क्षेत्र में हमें बहुत कुछ करना है विशेष कर सामाजिक कार्यकर्ता को पत्रकार को एवं अधिवक्ता को जो
लोकतंत्र की आत्मा है
उसको जीवित रखने के लिए मानवाधिकार के लिए हमें काम करना होगा
आयोग इस क्षेत्र में बहुत पीछे चल रहे हैं और
उनकी स्वतसंज्ञान लेने की स्थिति खराब हो रही है
हमें विश्व स्तर पर एवं देश स्तर पर जागरूकता की आवश्यकता है
संयुक्त राष्ट्र संघ के 1948 के 423(5,) में प्रस्ताव के अनुसार मानवाधिकार की व्याख्या की गई थी
(जिसमें लाइफ लिबर्टी इक्वलिटी डिग्निटी की बात की गई थी) मानवाधिकार की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोग बनाया गया था जो जो देश आयोग के इस प्रस्ताव को मानते थे उन देशों ने अपने देश में राष्ट्रीय स्तर पर राज्य स्तर पर मानवाधिकार आयोग का गठन किया भारत ने यह प्रस्ताव 1950 में माना था पर किंचित कार्य से आयोग का गठन नहीं हो पाया था इसका आयोग का गठन 1993 में हुआ और इसके प्रथम अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र बनाए गए जो इंदिरा गांधी जी के निधन कमीशन के अध्यक्ष भी थे
इस इसके अनुपालन में राज्यों ने भी आयोग बनाए पर मानवाधिकार आयोग के संबंध में विस्तृत अधिनियम भारत सरकार ने बनाया तथा राज्य सरकारों ने भी नियमावलिया बने पर देखने में आता है
कि मानवाधिकारों के संबंध में भारत में बहुत काम होना है
इस क्षेत्र में सामाजिक लोग पत्रकार अधिवक्ता समाज को ज्यादा काम करना है
प्रश्न उठता है कि मानवाधिकार है क्या जहां व्यक्ति की लाइफ की सुरक्षा हो जहां व्यक्त की स्वतंत्रता की सुरक्षा हो
जहां व्यक्ति के क्षमता की सुरक्षा हो जहां व्यक्ति के जीवन यापन की सुरक्षा हो
वही मानवाधिकार है यदि सरकार अच्छा काम करती हैं
यदि व्यक्ति को पानी नहीं मिलता खाना नहीं मिलता तो मानवाधिकार का उल्लंघन होता है
सरकारों का दायित्व चाहे लोकतांत्रिक सरकार हो या तानाशाही सरकार हो सभी को मानव के अधिकारों की रक्षा करना अनिवार्य है
यदि उसे देश में मानव ही नहीं रहेंगे तो किस बात की सरकार है
हमें बुद्धिजीवियों को भारतीय संविधान के तहत मानवाधिकारों के क्षेत्र में बहुत काम करने की आवश्यकता मैं
इस अवसर पर सभी को बधाई देता हूं तथा
सभी के मानवाधिकार के लिए शुभकामना देता हूं
जय हिंद जय भारत

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