श्रीराम कथा में मिलता है भगवान के पावन चरित्र का वर्णन :-प्रशांत जी महाराज
1 min readपूरा बाजार अयोध्या

स्थानीय रामलीला मैदान में चल रही श्रीराम कथा में शनिवार को कथा व्यास पूज्य प्रशांत जी महाराज ने सीता स्वयंवर का प्रसंग सुनाया। भगवान राम और माता सीता के विवाह की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।महाराज श्री ने कहा कि राजा जनक के दरबार में रखा गया भगवान शिव का विशाल धनुष कोई भी उठा नहीं पाया। स्वयंवर की तिथि पर आए सभी राजाओं के प्रयास विफल हो गए। गुरु की आज्ञा से श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई तो वह टूट गया और इसी के साथ सीता-राम का पावन विवाह हुआ। कथा व्यास ने कहा कि महापुरुष समाज और देश के लिए होते हैं। भगवान राम की विनम्रता से प्रेरणा लेनी चाहिए। बड़ी से बड़ी उपलब्धि मिलने पर भी अहंकार न करें। उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र हमारे लिए आचार संहिता है, जिसके श्रवण मात्र से जीवन का उत्थान होता है। उन्होंने बताया कि श्रीराम-सीता के साथ जनक ने अपनी अन्य तीन बेटियों का भी विवाह दशरथ पुत्रों से किया। मांडवी का भरत से, उर्मिला का लक्ष्मण से और सुकीर्ति का शत्रुघ्न से विवाह हुआ। कथा के दौरान “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का संदेश देते हुए महाराज श्री ने कहा कि बेटी संस्कारों की धरोहर होती है, जो दो परिवारों को जोड़ती है। श्रीराम कथा के इस दिव्य प्रसंग को सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण राममय हो गया। इस अवसर पर रमाकांत यादव, महंत राजू दास हनुमानगढ़ अयोध्या व भारत कुंड से पधारे महंत के साथ साधु संत कथा श्रवण किया कथा आयोजन पूर्व जिला पंचायत सदस्य शंभू नाथ सिंह दीपू व मुख्य यजमान विजय नाथ सिंह आए हुए सभी श्रोताओं का दिल से आभार व्यक्त किया।
सुरेश कुमार मिश्र मंडल ब्यूरो अयोध्या
