February 16, 2026

Awadh Speed News

Just another wordpress site

नेटवर्किंग कंपनियों के नेटवर्कर जो कहते है अपने आप को ‘आयुर्वेद सलाहकार’ खुद बीमार, फिर भी बाँट रहे इलाज

1 min read
Spread the love

नेटवर्किंग कंपनियों के नेटवर्कर जो कहते है अपने आप को ‘आयुर्वेद सलाहकार’ खुद बीमार, फिर भी बाँट रहे इलाज, अगर दवा से किसी की जान गई तो कौन होगा जिम्मेदार

लखनऊ
नेटवर्किंग कंपनियों की ओर से बनाए गए तथाकथित नेटवर्कर जो अपने आप को कहते है “आयुर्वेद सलाहकार” एक नए विवाद के केंद्र में हैं। हालात यह हैं कि इनमें से कई ऐसे नेटवर्कर सलाहकार स्वयं बीमार रहते हैं या उनके घरों में कोई न कोई सदस्य बीमार रहता है, फिर भी वे आमजन को इलाज का भरोसा दिलाते हैं। सवाल यह उठ रहा है कि अगर इनकी दी हुई दवा से किसी की हालत बिगड़ जाए या मौत हो जाए तो जिम्मेदार कौन होगा—कंपनी या वह सलाहकार?

जानकारों के अनुसार, आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण और बिक्री Drugs and Cosmetics Act, 1940 व AYUSH मंत्रालय के नियमों के तहत होती है। वहीं, किसी दवा को लिखने या सेवन की सलाह देने का अधिकार केवल बी.ए.एम.एस. डिग्रीधारी चिकित्सकों या पंजीकृत वैद्यों को है। नेटवर्किंग कंपनियों से जुड़े सलाहकार इस श्रेणी में नहीं आते।

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई नेटवर्कर गलत दवा बेचकर लोगों को गुमराह करता है और नुकसान होता है, तो यह मामला Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954 के उल्लंघन के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (BNS-2023) के प्रावधानों में भी आता है।

धारा 318 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति या सेवा लेना) लागू हो सकती है।

धारा 415 (जनता को धोखे में डालकर नुकसान पहुँचाना) भी ऐसे मामलों में लग सकती है।

यदि दवा से गंभीर नुकसान या मृत्यु होती है तो धारा 120 (लापरवाही से जीवन को जोखिम में डालना) जैसी धाराएँ भी लागू हो सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय है कि जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति की नहीं है। यदि कोई कंपनी अपने नेटवर्कर को “सलाहकार” कहकर दवा बेचने के लिए प्रेरित करती है, तो कानूनी तौर पर कंपनी और सलाहकार दोनों पर कार्रवाई हो सकती है।

चिकित्सकों की चेतावनी है कि “आयुर्वेद एक प्रमाणित चिकित्सा पद्धति है, लेकिन यह तभी सुरक्षित है जब सही वैद्य या रजिस्टर्ड चिकित्सक की देखरेख में दवा ली जाए। केवल नेटवर्किंग या पैसों के लालच में बेची गई दवा खतरनाक साबित हो सकती है।”

समाज के बुद्धिजीवियों ने भी लोगों से अपील की है कि अपने शरीर को प्रयोगशाला न बनाएँ और किसी भी दवा का सेवन केवल योग्य चिकित्सक की सलाह पर ही करे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *