February 16, 2026

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प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला, रिश्वत के बिना नहीं मिलती किस्त, अधिकारी मौन”

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मऊगंज

जिले की सीतापुर ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसे गरीबों की छत के लिए शुरू किया गया था, अब “रिश्वत योजना” में तब्दील होती नज़र आ रही है। गरीब हितग्राही खुलेआम शोषण का शिकार हैं, और पंचायत कर्मचारी उनसे सीधे-सीधे रुपये वसूल कर रहे हैं। ग्राम डूडा दुआरी के रवि लाल साकेत का आरोप है कि रोजगार सहायक सुरेंद्र पटेल ने उनसे पहली किस्त जारी करने के नाम पर ₹5000 वसुले। किस्त खाते में आने के बाद जब दूसरी बार रुपये देने से इनकार किया, तो जवाब मिला – “ऊपर देना पड़ता है, वरना दूसरी किस्त भूल जाओ।” इसी गांव के कृष्ण कुमार साकेत, जो अनाथ बालक हैं, उनसे भी ₹4500 की मांग की गई। मजबूरी में पैसा दिया, लेकिन दूसरी किस्त रोक दी गई। वहीं बबलू साकेत, जिनका नाम 2017 की सूची में दर्ज है, वे आज 2025 तक भी किस्त से वंचित हैं। उनका आरोप है कि ₹5000 से ₹10,000 की रिश्वत देने वाले लोगों को मकान मिल गया, और जो गरीब रुपये नहीं दे सके वे अब भी बिना छत के लिए भटक रहे हैं। यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, गरीबों की ज़िंदगी से खिलवाड़ है। जिनके मकान जर्जर हैं, उनकी जान खतरे में है। यह सिस्टम गरीबों को राहत नहीं, बल्कि रिश्वत की मार दे रहा है।

अधिकारियों का मौन, भ्रष्टाचार का संरक्षण
जब पत्रकार ने जनपद सीईओ रामकुशल मिश्रा से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन उठाकर कहा – “आधे घंटे में बात करते हैं।” लेकिन घंटे नहीं, दिन बीत गए और उनका जवाब अब तक नहीं आया। वहीं अन्य अधिकारियों को दो-दो बार फोन लगाया गया, मगर उन्होंने फोन उठाना तक गवारा नहीं किया। सवाल उठता है कि अगर अधिकारी फोन तक न उठाएं, तो क्या इसे सिर्फ लापरवाही कहा जाए या फिर भ्रष्टाचार को बचाने की सोची-समझी चाल? ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर हो रहे इस घोटाले में ऊपरी स्तर की मिलीभगत साफ झलक रही है।

सरकार की साख पर सवाल
मुख्यमंत्री मोहन यादव बार-बार कहते हैं कि गरीबों की योजनाओं में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन मऊगंज की इस पंचायत में जो हालात हैं, उससे यह साफ होता है कि सरकार के आदेश सिर्फ कागज़ों में कैद हैं। ज़मीनी स्तर पर गरीबों की छत पर ही डाका डाला जा रहा है और अधिकारी भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे बैठे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है – “अगर मुख्यमंत्री में ईमानदारी है, तो सीतापुर पंचायत में हो रहे इस भ्रष्टाचार की जांच कराई जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए। वरना सरकार खुद भी इस घोटाले की भागीदार मानी जाएगी।”

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