रोंगटे खड़े करने वाले हैं आजादी के दीवानों के अनसुने किस्से—शैक्षिक संवाद मंच के पुस्तक संवाद कार्यक्रम में मंजिल तक चलते रहे ‘क्रांतिपथ के राही’—#
1 min readरोंगटे खड़े करने वाले हैं आजादी के दीवानों के अनसुने किस्से–शैक्षिक संवाद मंच के पुस्तक संवाद कार्यक्रम में मंजिल तक चलते रहे ‘क्रांतिपथ के राही’
बांदा।
शैक्षिक संवाद मंच उत्तर प्रदेश द्वारा मासिक पुस्तक संवाद कार्यक्रम के सातवें संस्करण के अंतर्गत गत दिवस शिक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद दीक्षित मलय द्वारा संपादित 33 शिक्षक और शिक्षिकाओं द्वारा लिखित आजादी के अचर्चित नायकों के जीवनवृत्त आधारित संग्रह ‘क्रांतिपथ के राही’ पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद् मनोज कुमार वार्ष्णेय, वरिष्ठ प्रवक्ता डायट-आगरा ने पुस्तक को प्रथम पृष्ठ से अंतिम पृष्ठ तक आकर्षक और उपयोगी बताया। आपने कहा कि पुस्तक में संपादक और लेखकों के पूर्व अनुभवों को सटीक तरीके से समायोजित किया गाय है। बताते चलें कि इस पुस्तक में लेखकों द्वारा अपने आस-पास के उन क्रांतिकारियों और घटनाओं को विधिवत् अनुसन्धान करके लिखा गया है जिन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली या कम महत्त्व दिया गया।
इस पुस्तक पर चर्चा में 30 लेखक और पाठकों ने प्रतिभाग किया। सहभागी लेखकों में प्रीति भारती, डॉ०अरविन्द कुमार द्विवेदी, डॉ० श्रवण कुमार गुप्त, दीप्ति राय ‘दीपांजलि’, रिम्पू सिंह, मीरा रविकुल आदि ने लेखन के दौरान आयी चुनौतियों और तथ्यों की प्रामाणिकता के लिए किये गए प्रयासों की चर्चा करते हुए पुस्तक के विविध पक्षों यथा लेखों के गुणवत्ता, पुस्तक कवर, छपाई और उपयोगिता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि लेखक और और शिक्षक विजय प्रकाश जैन (राजस्थान) ने कहा, “इस पुस्तक में शामिल तैतीस क्रांतिकारियों में से तीस से मैं अनभिज्ञ था। इसे संरक्षित करने के लिए मैंने लेखों की अलग-अलग छायाप्रतियां कराकर पुस्तकालय में रखा है ताकि अधिक से अधिक बच्चे इन क्रांतिकारियों की भावनाओ से परिचित हो सकें।” पुस्तक में वासुदेव बलवंत फडके, मातादीन बाल्मीकि, राणा बेनीमाधव सिंह, राव रामबख्श सिंह, शचीन्द्र सान्याल, रानी ताईबाई, भगवती चरण वोहरा, पृथ्वी सिंह, अलगू यादव, कालीबाई, पब्बर सिंह, गुलाब सिंह, पारसनाथ राय, मणीन्द्रनाथ बनर्जी, पद्मधर सिंह, राजा लोने सिंह, बालकृष्ण चाफेकर, मोहर्रम अली, बाबूराम, महादेव चौबे, रानी गाईदिन्ल्यू, मातंगिनी हाजरा, मुनीश्वर दत्त, देवकीनंदन सेनानी, उल्लासकर दत्त आदि क्रांतिकारियों की प्रेरक कथाओं सहित हापुड़, काकोरी, भूरागढ़ और चौरीचौरा की घटना सहित आजादी की लड़ाई में महिलाओं, मिठाइयों, काशी और तवायफों की भूमिका की चर्चा की गयी है। कार्यक्रम में विन्ध्येश्वरी प्रसाद ‘विन्ध्य’, शालिनी सिंह, क्षमा सिंह आदि पाठकों ने पुस्तक को अध्यापकों, बच्चों सहित प्रतियोगी छात्रों के अत्यंत उपयोगी बताया।
पुस्तक के संपादक और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षक प्रमोद दीक्षित मलय ने इस पुस्तक के लेखन से जुड़े विवध पक्षों यथा प्रशिक्षण, लेखन हेतु संवाद, लेख संपादन, कवर डिजाइन आदि पर विस्तार पूर्वक चर्चा करते हुए संवाद के दौरान उठे सवालों का जवाब भी दिया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक दुर्गेश्वर राय ने किया। शैक्षिक संवाद मंच द्वारा शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पुस्तकों पर प्रतिमाह पुस्तक संवाद का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष मंच द्वारा प्रकाशित पुस्तकों पर संवाद किया जा रहा है। मार्च माह में संवाद के लिए शिक्षा के पथ पर पुस्तक का चयन किया गया है।

प्रमोद दीक्षित. मलय.की कलम से
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